सत्ता की लालसा में नेताओं को नहीं जनता की चिंता, नियमों को ताक पर रख हो रहे राजनीतिक कार्यक्रम

सत्ता की लालसा में नेताओं को नहीं जनता की चिंता, नियमों को ताक पर रख हो रहे राजनीतिक कार्यक्रम

मंदसौर/ तरुण राठौर। वैश्विक महामारी कोरोना के बीच प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। जिसको देखते हुए दोनों ही पार्टी में राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। क्योंकि उपचुनाव ही प्रदेश सरकार का भविष्य तय करेगा। जिसको ध्यान में रखते हुए सत्ता पक्ष हो या विपक्ष कोरोना के बढ़ते प्रभाव को कम आंक रहे है। सत्ता की लालसा में बेचारी जनता को कोरोना जैसी घातक बीमारी की चपेट में आने के लिए दांव पर लगा दिया है। जिसका उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्हें तो बस अपनी सत्ता को स्थापित रखने से मतलब है।

राजनेता रोजाना गांवों में जाकर मीटिंग कर रहे है, इस मीटिंग में 100 से अधिक लोग सम्मलित हो रहे है। वह भी सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों को धता बताते हुए। वहां पर जमकर सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिसका एक उदारण कल देखने को मिला जब सत्ता पक्ष के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय उपचुनाव के प्रचार के लिए सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे। जहां पर उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर टेन्ट लगाकर उनका स्वागत किया। जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओंं में कैलाश वियजवर्गीय के साथ सेल्फी लेने का इतना उत्साह था कि सोशल डिस्टेंस की जमकर धज्जियां उड़ाई। जिसको देखकर लग रहा था कि जिले में कोरोना जैसी कोई घातक बीमारी नहीं है। क्योंकि वहां मौजूद किसी में भी इस बीमारी का डर नहीं था। पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ को देख कर ऐसा लग रहा था मानो सरकार के सारे नियम आम जनता के लिए है, इन नेताओं के लिए नही है। ये लोग मंच लगाकर स्वागत कर रहे है, सोशल डिस्टेंड की धज्जियां उड़ा रहे है, लेकिन प्रशासन इन पर कोई नकेल नहीं कस रहा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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