MP 70th Foundation Day: 4 राज्यों के विलय से बना, भोपाल के राजधानी बनने पर जबलपुर में नहीं मनी थी दिवाली

1 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश अपने गठन के 70 साल पूरे कर लेगा। यह प्रदेश चार अलग-अलग हिस्सों- मध्य प्रांत, मध्यभारत, विंध्यप्रदेश और भोपाल को मिलाकर बनाया गया था। इसकी राजधानी चुनने को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था।
Madhya Pradesh

नई दिल्ली। 1 नवंबर 2025 यानी आज ‘भारत का दिल’ कहा जाने वाला मध्य प्रदेश अपने स्थापना दिवस के 70 साल पूरे कर रहा है। इन सात दशकों में प्रदेश ने कई ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक तरफ जहां इंदौर लगातार 8 सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बनकर कीर्तिमान बना रहा है, वहीं भोपाल गैस त्रासदी जैसा दर्दनाक इतिहास भी इससे जुड़ा है।

आज जो मध्य प्रदेश का नक्शा है, वह हमेशा से ऐसा नहीं था। 1956 से पहले यह क्षेत्र चार प्रमुख हिस्सों में बंटा हुआ था और इसके गठन की कहानी भी काफी दिलचस्प है।

चार राज्यों को मिलाकर हुआ गठन

15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद राज्यों के पुनर्गठन की मांग तेज हो गई। भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया। इसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया।

इसे बनाने के लिए चार तत्कालीन राज्यों का विलय किया गया था:

  • मध्य प्रांत: इसकी राजधानी नागपुर हुआ करती थी।
  • मध्य भारत: इसकी दो राजधानियां थीं, ग्वालियर (शीतकालीन) और इंदौर (ग्रीष्मकालीन)।
  • विंध्य प्रदेश: इसकी राजधानी रीवा थी।
  • भोपाल राज्य: यह एक अलग राज्य था जिसकी राजधानी भोपाल ही थी।

इन चारों को मिलाकर नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ, जिसमें नागपुर को महाराष्ट्र में शामिल कर दिया गया।

जब राजधानी चुनने पर हुआ बड़ा विवाद

किसी भी नए राज्य के लिए राजधानी का चुनाव एक अहम फैसला होता है। मध्य प्रदेश के गठन के बाद राजधानी के लिए ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और भोपाल जैसे बड़े शहरों के नाम सामने आए। नागपुर के महाराष्ट्र में जाने के बाद एक नए प्रशासनिक केंद्र की जरूरत थी।

लंबी चर्चा और खींचतान के बाद भोपाल को चुना गया। इसके पीछे कई कारण थे। भोपाल की भौगोलिक स्थिति राज्य के केंद्र में थी, जिससे प्रशासनिक कामकाज में सुविधा होती। इसके अलावा, यहां प्रशासनिक कार्यों के लिए पहले से कई सरकारी इमारतें भी मौजूद थीं।

हालांकि, इस फैसले से जबलपुर में भारी नाराजगी देखने को मिली। विरोध इतना बढ़ा कि उस साल जबलपुर के लोगों ने दिवाली तक नहीं मनाई थी।

त्रासदी और विभाजन का दौर

राज्य के इतिहास में 2-3 दिसंबर 1984 की रात एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। इस दिन भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड के कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनाइट (MIC) गैस का रिसाव हुआ, जिसने हजारों लोगों की जान ले ली। यह दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक है।

इसके गठन के 44 साल बाद, साल 2000 में मध्य प्रदेश का एक बार फिर पुनर्गठन हुआ। इसके दक्षिण-पूर्वी हिस्से को अलग कर छत्तीसगढ़ नाम से एक नया राज्य बनाया गया। इस विभाजन के बाद मध्य प्रदेश अपने मौजूदा स्वरूप में आया। राज्य के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल बने थे।

ये जानकारी भी मजेदार है

  1. पहले राज्यपाल: डॉ. पट्टाभि सीतारमैया
  2. पहली महिला: राज्यपाल सरला ग्रेवाल
  3. पहले मुख्यमंत्री: पंडित रविशंकर शुक्ल
  4. पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री: कैलाश चंद्र जोशी
  5. पहली महिला मुख्यमंत्री: उमा भारती
  6. पहले मुख्य न्यायाधीश: एम. हिदायतुल्लाह
  7. पहले विधानसभा अध्यक्ष: कुंजीलाल दुबे
  8. पहले मुख्य सचिव: एच. एस. कामथ
  9. पहली महिला मुख्य सचिव: निर्मला बूच
  10. पहले महाधिवक्ता (Advocate General): एम. धर्माधिकारी
  11. पहली आदिवासी महिला राज्यपाल: उर्मिला सिंह
  12. लोक सेवा आयोग के पहले अध्यक्ष: डी. वी. रेगे
  13. पहला राष्ट्रीय उद्यान: कान्हा किसली
  14. पहला विश्वविद्यालय: डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय
  15. पहला बायोस्फीयर रिज़र्व: पंचमढ़ी
  16. पहला अख़बार: ग्वालियर न्यूज़ पेपर
Banshika Sharma
लेखक के बारे में
Banshika Sharma

कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
Follow Us :GoogleNews