मध्यप्रदेश के छोटे शहरों और जिलों में रहने वाले मरीजों को अक्सर फिजियोथेरेपी इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। कई मरीजों को हड्डी, नसों, लकवा, स्पोर्ट्स इंजरी या ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की जरूरत होती है, लेकिन सुविधा पास में न होने से इलाज अधूरा रह जाता है।
अब प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लेने जा रही है। योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में हाई-टेक फिजियोथेरेपी अस्पताल खोले जाएंगे, जहां आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से मरीजों का इलाज किया जाएगा।
हर जिले में बनेगा हाई-टेक फिजियोथेरेपी अस्पताल
प्रदेश की स्वास्थ्य नीति और आगामी बजट को ध्यान में रखते हुए फिजियोथेरेपी सेवाओं को मजबूत करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी सिलसिले में भौतिक चिकित्सक कल्याण संघ के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से मुलाकात कर जरूरी संसाधन और बजट को लेकर चर्चा की।
योजना के अनुसार हर जिले में अलग से फिजियोथेरेपी अस्पताल बनाए जाएंगे। इन अस्पतालों में एडवांस मशीनें, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध होंगे। इससे लकवा, जोड़ों का दर्द, रीढ़ की समस्या, खेल चोट, सर्जरी के बाद की रिकवरी और नसों से जुड़ी बीमारियों का बेहतर इलाज संभव होगा।
PHC और CHC स्तर तक पहुंचेगी फिजियोथेरेपी सुविधा
सरकार की योजना सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं है। हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भी फिजियोथेरेपी यूनिट शुरू की जाएगी।
हर यूनिट में एक पुरुष और एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य होगी, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिल सके। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब छोटे दर्द या चोट के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कदम से बुजुर्गों, दुर्घटना के मरीजों और सर्जरी के बाद रिकवरी कर रहे लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
मेडिकल कॉलेजों में शुरू होंगे फिजियोथेरेपी के नए कोर्स
प्रदेश के सभी सरकारी एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों में अब अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट फिजियोथेरेपी कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे प्रदेश में प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट की संख्या बढ़ेगी।
पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने जनवरी 2026 में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी कोर्स शुरू करने की घोषणा की थी, जिसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा में भी की थी। अब आगामी बजट में इसके लिए फंड आवंटन की तैयारी है। इन कोर्स के शुरू होने से छात्रों को नए रोजगार अवसर मिलेंगे और अस्पतालों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी भी दूर होगी।
विशेषज्ञता के आधार पर होगी फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति
नई व्यवस्था के तहत फिजियोथेरेपिस्ट को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर अस्पतालों के अलग-अलग विभागों में नियुक्त किया जाएगा। जैसे न्यूरो, ऑर्थोपेडिक, कार्डियक, स्पोर्ट्स और पोस्ट-सर्जिकल रिकवरी विभागों में अलग-अलग विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
इससे मरीजों को बेहतर और सटीक इलाज मिल सकेगा। साथ ही सरकारी संस्थानों में कार्यरत फिजियोथेरेपिस्ट के लिए एक समान और सम्मानजनक वेतन व्यवस्था लागू करने की भी तैयारी है।





