
MP Tourism: मध्य प्रदेश भारत का एक बहुत ही खूबसूरत राज्य है। इस राज्य को अपनी संस्कृति और इतिहास की वजह से पहचाना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता भी यहां बहुत कमाल की है जो किसी का भी दिल जीत सकती है। मध्य प्रदेश में घूमने फिरने के लिए कई सारे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान मौजूद है। अगर आप मध्य प्रदेश के इतिहास से रूबरू होना चाहते हैं तो आपको इन स्थानों का दीदार जरूर करना चाहिए।
मध्य प्रदेश में एक नहीं बल्कि कई सारे धार्मिक स्थल मौजूद है जो अपने चमत्कारों की वजह से पहचाने जाते हैं। आज हम आपके यहां के एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताते हैं जहां रोजाना पट खुलते ही शिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है। पट खुलने से पहले यहां भगवान की पूजन कौन करता है कि आज भी रहस्य बना हुआ है।
विदिशा जिले में है ये मंदिर
हम जिस शिव मंदिर की बात कर रहे हैं वह विदिशा जिले के गंजबासौदा तहसील के उदयपुरा गांव में है। इसे नीलकंठ महादेव मंदिर के नाम से पहचाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार मंदिर के पट खुलते ही शिवलिंग पर फूल चढ़ा हुआ मिलता है। यह बात आज तक रहस्य बनी हुई है और स्थानीय लोगों के बीच इस बारे में कई तरह की कहानी भी प्रसिद्ध है।
बेजोड़ शिल्पकला का नमूना
मध्य प्रदेश में ऐसे कहीं स्थान है जिनके बारे में लोग जानते हैं लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी है जिनके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की गंजबासौदा तहसील से 22 किलोमीटर दूर मौजूद है शिव मंदिर भेजो शिल्प कला का प्रतीक है। इस मंदिर की बनावट देखकर आपको भोपाल के पास मौजूद भोजपुर महादेव मंदिर की याद आ जाएगी। मंदिर का ढांचा अपने आप में अनोखा है। परमार राजवंश के शासक शिव के उपासक थे और अपने राज में उन्होंने अनगिनत मंदिर छात्रावास और पाठशालाओं का निर्माण किया था।
वर्जित है रात में प्रवेश
महादेव का ये मंदिर भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि पर यहां भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि परमार वंश के शासक राजा उदयादित्य ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर में रोजाना फूल चढ़ा मिलना आज भी रहस्य है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बुंदेलखंड के सेनापति आल्हा और उदल महादेव के अनन्य भक्त थे। वह रात में आकर यहां पूजा करने के साथ भोलेनाथ को कमल का फूल अर्पित करते हैं। सुबह जब पट खोलते हैं तुम्हारे के चरणों में फूल अर्पित किया हुआ मिलता है।
शिखर पर है व्यक्ति का आकार
इस मंदिर से जुड़ी एक और कहानी के मुताबिक एक ही व्यक्ति ने इसे रातों-रात बनाकर तैयार किया था। उसने मंदिर तैयार भी कर दिया था लेकिन जब वह वापस नीचे आ रहा था तो उसे याद आया कि उसका झूला ऊपर ही रह गया है। वह अपना झूला लेने के लिए ऊपर चढ़ा और नीचे उतर ही रहा था तभी मुर्गी ने बांग दे दिया। जैसे ही सुबह हुई वह व्यक्ति वही रह गया। मंदिर के शिखर पर आज भी व्यक्ति का आकार दिखाई देता है।
10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

