सरस्वती पूजा में पहुंचे नरोत्तम ने बढ़ाया बेटियों का हौसला, बोले.. पंखों को खोल जमाना उड़ान देखता है

सरस्वती पूजा में पहुंचे नरोत्तम ने बढ़ाया बेटियों का हौसला, बोले.. पंखों को खोल जमाना उड़ान देखता है

डबरा, सलिल श्रीवास्तव।  दतिया और डबरा के दो दिवसीय प्रवास पर पहुंचे मध्यप्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra)  शनिवार को डबरा  (Dabra News) के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे और उन्होंने मां सरस्वती की महा आरती की और छप्पन भोग कार्यक्रम में शामिल हुए। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि परिवर्तन के इस दौर में आपके हाथ में मोबाइल है लेकिन ये जानकारी तो दे सकता है लेकिन ज्ञान के लिए गुरु और किताबों की जरुरत होती है।  उन्होंने बेटियों का हौसला बढ़ाते हुए ये अपनी मंजिल हासिल करने का समय है।  डॉ नरोत्तम मिश्रा ने एक शेर सुनाते हुए कहा –  “यूँ दूर बैठकर आसमान देखता है, पंखों को खोल जमाना उड़ान देखता है”

सरस्वती पूजा में पहुंचे गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने विद्यालय की छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का युग तकनीकी का युग है, में देख रहा हूँ कि आज अधिकांश छात्राओं के हाथ में मोबाइल है, मोबाइल में गूगल है, लेकिन गूगल जानकारी तो दे सकता है, लेकिन गुरु नहीं बन सकता, गूगल के हम पैर नहीं छू सकते।  इसलिए जानकारी अर्जित करने के लिए हम गूगल का सहारा तो ले सकते हैं लेकिन संस्कार हमें गुरु से ही मिलते हैं।

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उन्होंने कहा कि गुरु से मिला ज्ञान और संयुक्त परिवार से मिली शिक्षा हमें कभी असफल नहीं होने देती।  नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पहले टीवी आया उसने बहुत नुकसान किया बच्चे मैदान से कट गए , गली, मोहल्ले, खेल मैदान सूने हो गए।  बच्चे अब टीवी पर सीरियल का इन्तजार करते हैं जो ज्यादातर परिवार तोड़ने का काम करते हैं।

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गृह मंत्री ने बच्चियों से कहा कि ये समय आपका अपना भविष्य बनाने का समय है उड़ान भरने का समय , लक्ष्य हासिल करने का समय है। इसलिए जितना टीवी मोबाइल से बच सकते हो बचो।  उन्होंने एक शेर सुनते हुए बच्चियों का हौसला बढ़ाया –  “यूँ दूर बैठकर आसमान देखता है, पंखों को खोल जमाना उड़ान देखता है”

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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