यहां चहलकदमी करती नजर आई बाघिन, लोगों ने कैमरे में कैद किया नजारा

यहां चहलकदमी करती नजर आई बाघिन, लोगों ने कैमरे में कैद किया नजारा

पन्ना। अगर आप सैर पर निकले है और अचानक आपके सामने बाघ या बाघिन आ जाए तो आप क्या करेंगे। अरे..घबराइए नहीं हम आम रास्ते की नहीं बल्कि पन्ना टाईगर रिसर्व की बात कर रहे हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व सैर करने आने वाले लोगों की बस एक ही ख्वाहिश होती है कि उन्हें बाघ और बाघिन के दर्शन हो जाए और जब वाकई ऐसा होता है तब लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

ऐसा ही कुछ शनिवार सुबह हुआ। पन्ना टाइगर रिजर्व में भ्रमण करने आए लोगों के सामने अचानक बाघिन पी-151 आ गई। कुछ देर के लिए तो लोगोंं की सांसे थम गई, लेकिन बाघिन को सामने देख कर लोग उत्साह से भर गए और इस नजारे को कैमरे में कैद करने लगे। बाघिन पी-151 भी पर्यटकों को देखकर कुछ देर उनके सामने अटखेलियां करती हुई चलहकदमी करती नजर आई और फिर झाडिय़ों के पीछे जंगल में चली गई। मानसून सीजन में बाघिन की चहलकदमी पर्यटकों को आनंदित कर रही है। गौरतलब है कि इन दिनों बाघ विहीन होने के बाद एक बार फिर पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ा है। अब टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिन और शावकों की संख्या 65 हो गई है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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