
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने चचेरे भाइयों उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के हालिया नजदीकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है, लेकिन साथ ही यह जनता को यह संदेश भी देता है कि लोग उन्हीं का समर्थन करते हैं, जो उनके कल्याण के लिए काम करते हैं। ‘पीटीआई’ को दिए वीडियो इंटरव्यू में शिंदे ने कहा कि उद्धव ने कभी राज ठाकरे को दरकिनार किया था, जिसके चलते 2005 में राज नाटकीय तरीके से शिवसेना से अलग हो गए थे, ऐसे में दोनों का फिर एक साथ आना विडंबनापूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी किसी से भी हाथ मिला सकता है, यह व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन जनता काम करने वालों को ही चुनती है।
उद्धव-राज की नजदीकी पर शिंदे का तंज
शिंदे ने अप्रत्यक्ष रूप से उद्धव पर निशाना साधते हुए कहा, “लोग काम को पहचानते हैं, ‘नाम’ को नहीं। उन्होंने पहचान लिया है कि कौन उनके लिए काम करता है और कौन घर पर बैठता है। लोग उन लोगों को घर पर बैठा देते हैं, जिन्हें घर पर बैठना पसंद है।” करीब तीन साल पहले शिंदे ने उद्धव के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार से बगावत की थी, आरोप लगाते हुए कि उद्धव ने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व सिद्धांत को छोड़ दिया है। जून 2022 में वे दो-तिहाई से अधिक विधायकों के साथ अलग होकर भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बने और बाद में निर्वाचन आयोग ने उनके गुट को ‘असली’ शिवसेना का दर्जा दिया।
ठाकरे बंधु पिछले महीने मुंबई में एक विजय रैली में साथ नजर आए थे, जब महाराष्ट्र सरकार ने विवादास्पद त्रिभाषा नीति वापस ले ली थी, जिसमें प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी अनिवार्य की गई थी। इस पर शिंदे ने कहा, “लोकतंत्र में कोई भी गठबंधन बना सकता है, मैं आलोचना नहीं करूंगा, लेकिन अपने ढाई साल के कार्यकाल में मैंने और देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई और महाराष्ट्र के विकास के लिए कई अहम फैसले लिए हैं।”
जब उनसे उद्धव द्वारा उन्हें ‘गद्दार’ कहने पर सवाल किया गया, तो शिंदे ने पलटवार करते हुए कहा कि असली ‘गद्दार’ वही हैं जिन्होंने 2019 में भाजपा-शिवसेना को मिला जनादेश कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करके धोखा दिया। शिंदे के अनुसार, उद्धव ने मतदाताओं के विश्वास का अपमान किया और 2024 विधानसभा चुनाव में जनता ने उन्हें इसका उचित जवाब दिया।
