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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी परीक्षा समाप्त

राज्य में मराठी और हिंदी भाषा को लेकर चल रही लंबी बहस के बीच राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा की व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी है। कड़े विरोध के बाद लिए गए इस निर्णय में सरकार ने कहा है कि महाराष्ट्र के प्रशासनिक कामकाज में मराठी भाषा का इस्तेमाल होता है, जबकि केंद्र और अन्य राज्यों के साथ आधिकारिक पत्राचार मुख्य रूप से अंग्रेजी में किया जाता है।
CM Devendra Fadnavis

CM Devendra Fadnavis

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा परीक्षा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। मराठी भाषा विभाग ने 31 अगस्त को आधिकारिक शासन निर्णय जारी कर यह व्यवस्था रद्द की है। यह निर्णय 7 मई 2026 से लागू माना जाएगा। इसके साथ ही 1976 से चले आ रहे संबंधित सभी पुराने शासन निर्णय, परिपत्रक और आदेश भी रद्द कर दिए गए हैं।

सरकार के निर्णय के अनुसार, भाषा संचालनालय द्वारा और इससे पहले एतदर्थ मंडल के माध्यम से आयोजित की जाने वाली हिंदी भाषा परीक्षा अब नहीं होगी। फैसले में हिंदी परीक्षा से संबंधित कई पुराने आदेशों का उल्लेख किया गया है, जिनमें 10 जून 1976 का शासन निर्णय और 25 मई 1981 का शासन निर्णय भी शामिल हैं।

विवाद की शुरुआत

अप्रैल 2026 में भाषा संचालनालय ने गजेटेड अधिकारियों और नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए 28 जून 2026 को हिंदी भाषा परीक्षा आयोजित करने की अधिसूचना जारी की थी। परीक्षा मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर केंद्रों पर होनी थी। यह परीक्षा उन कर्मचारियों के लिए अनिवार्य थी जिन्होंने 10वीं कक्षा तक हिंदी नहीं पढ़ी थी। परीक्षा पास न करने पर वेतन वृद्धि या पदोन्नति प्रभावित हो सकती थी। यह व्यवस्था मुख्य रूप से 10 जून 1976 के शासन निर्णय पर आधारित थी। हर साल लगभग 2,000 से 2,500 कर्मचारी इस परीक्षा में शामिल होते थे।

विरोध और सरकार का रुख

परीक्षा की घोषणा होते ही इसका विरोध शुरू हो गया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सबसे मुखर विरोध किया। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे हिंदी थोपने की कोशिश बताया और चेतावनी दी कि परीक्षा केंद्रों पर प्रदर्शन होगा। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने भी सवाल उठाया कि जब मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिला है तो कर्मचारियों पर हिंदी परीक्षा क्यों अनिवार्य की जा रही है। मराठी अभ्यास केंद्र के डॉ. दीपक पवार सहित भाषा संगठनों ने कहा कि प्रशासनिक कामकाज मराठी में होता है, इसलिए गैर-मराठी कर्मचारियों को मराठी सिखाने पर ध्यान देना चाहिए।

पहले परीक्षा रद्द और फिर पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय

व्यापक विरोध के बाद सरकार ने 7 मई को परीक्षा स्थगित करने और 1976 के नियमों की इसकी समीक्षा का ऐलान किया। इसके बाद मराठी भाषा विभाग ने 31 अगस्त 2026 को अंतिम शासन निर्णय जारी किया, जिसमें परीक्षा पूरी तरह रद्द कर दी गई। इस निर्णय के बाद कर्मचारियों को वेतन वृद्धि या पदोन्नति के लिए हिंदी परीक्षा पास करने की बाध्यता नहीं रहेगी।

31 अगस्त के शासन निर्णय में सरकार ने फैसले का प्रशासनिक आधार स्पष्ट किया है। सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र राज्य बनने के बाद सरकारी कामकाज के लिए मराठी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौजूदा सरकारी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल बेहद नगण्य है। केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों के साथ होने वाला आधिकारिक पत्राचार मुख्य रूप से अंग्रेजी में किया जाता है। महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम और मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए हिंदी भाषा परीक्षा को जारी रखना उचित नहीं है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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