75वें जन्मदिन पर मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा– बढ़ रही है असहिष्णुता, देव भक्ति और देशभक्ति एक ही

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हर बयान पर देशभर में ध्यान दिया जाता है। गुरुवार 11 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर नागपुर में उन्होंने समाज और देश से जुड़े कई मुद्दों पर विचार रखे।
Mohan Bhagwat

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हर बयान पर देशभर में ध्यान दिया जाता है। गुरुवार 11 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर नागपुर में उन्होंने समाज और देश से जुड़े कई मुद्दों पर विचार रखे। भागवत ने कहा कि असहिष्णुता और असंतोष लोगों में लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विज्ञान और मानव ज्ञान में प्रगति के बावजूद जारी संघर्षों को लेकर चिंता जताई। इस अवसर पर उन्होंने देव भक्ति और देशभक्ति के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा, “देव भक्ति और देशभक्ति थोड़ा अलग-अलग लगते हैं, लेकिन भारत में ये दोनों एक ही बात हैं। जो सच्ची भक्ति करेगा, वह देशभक्ति भी करेगा, और जो निष्ठा से देशभक्ति करेगा, उससे भगवान देव भक्ति भी करवा लेंगे। यह तर्क नहीं बल्कि अनुभव है।” उन्होंने आगे कहा कि जीवन अपनेपन की भावना पर आधारित है, लेकिन आज की दुनिया इस भावना के लिए तरस रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो हजार सालों से दुनिया अधूरे विचारों के आधार पर आगे बढ़ रही है, जिसकी वजह से असहिष्णुता और असंतोष बढ़ा है।

75वें जन्मदिन पर मोहन भागवत का बड़ा बयान

आरएसएस प्रमुख ने त्याग और कर्तव्य के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “शिव त्याग और सेवा के आदर्श हैं, लेकिन त्याग का अर्थ कर्तव्यों को छोड़ देना नहीं है। जब कर्तव्य सामने आते हैं तो उन्हें पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया जाता है।” उन्होंने कहा कि हमें ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जो केवल एहसान जताने के लिए या दुनिया पर हावी होने के लिए हो। भागवत ने कहा कि संसार हमें शिक्षक कह सकता है, लेकिन हम संसार को मित्र कहेंगे।

मोहन भागवत का जन्म 11 सितंबर 1950 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में हुआ था। वे मार्च 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक हैं और 16 साल से अधिक समय से इस पद पर कार्यरत हैं। वे कार्यकाल की अवधि के मामले में एमएस गोलवलकर और मधुकर दत्तात्रेय देवरस (बालासाहेब) के बाद तीसरे स्थान पर आते हैं। बालासाहेब ने 20 साल और गोलवलकर ने 32 साल तक संघ का नेतृत्व किया। भागवत ने लगभग 50 साल पहले आरएसएस प्रचारक के रूप में काम करना शुरू किया था। उनके पिता मधुकरराव भागवत भी संघ के प्रचारक थे। अपने लंबे अनुभव और नेतृत्व के चलते आज भागवत को संघ की विचारधारा का प्रमुख स्तंभ माना जाता है।

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