नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानों को बंद रखने को लेकर महाराष्ट्र में सियासी बहस तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि नवरात्रि में पूरे प्रदेश में मीट शॉप बंद रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दौरान पूरे देश के हिंदू देवी की पूजा, आराधना और उपासना में लगे रहते हैं, ऐसे में सात्विक और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखना जरूरी है। निरुपम ने कहा कि पिछले साल भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था और इसके लिए पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी।
संजय निरुपम ने कहा कि नवरात्रि बहुत ही पवित्र और सात्विक पर्व है। इस दौरान हर गली और मोहल्ले में श्रद्धालु पूजा-पाठ और व्रत में संलग्न रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भक्तजन मां दुर्गा की साधना और उपासना में लगे हैं, तो सड़कों और चौक-चौराहों पर मांसाहारी दुकानों का खुले रहना वातावरण को दूषित करता है। उन्होंने सरकार और पुलिस से अपील की कि इस बार इसे लेकर ठोस कदम उठाए जाएं।
नवरात्रि में मीट की दुकानों को बंद रखने की मांग
शिवसेना प्रवक्ता ने आगे कहा कि अगर किसी को मीट खाने का शौक है तो वह अपने घर में खा सकता है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर मीट की दुकानें और स्टॉल लगना आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि यह केवल हिंदुओं की आस्था का सवाल नहीं है बल्कि समाज में सामंजस्य और शांति का भी मुद्दा है। निरुपम ने जोर देते हुए कहा कि सरकार और पुलिस प्रशासन को ऐसे आदेश जारी करने चाहिए ताकि त्योहार के दौरान सात्विक वातावरण बना रहे।
एक सवाल के जवाब में संजय निरुपम ने मुरादाबाद में पैगंबर मुहम्मद के सम्मान में निकाले गए जुलूस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ‘आई लव मुहम्मद’ एक अच्छा प्रयास है और हर धर्म के अनुयायियों को अपने भगवान से मोहब्बत करनी चाहिए। इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है, लेकिन इस बहाने दूसरे धर्म या उनके देवी-देवताओं के प्रति नफरत फैलाना पाप है। उन्होंने कहा कि जुलूस अगर सम्मान और श्रद्धा के लिए निकाला जाए तो ठीक है, लेकिन अगर यह हिंसा और तोड़फोड़ में बदलता है तो उस प्यार का मकसद ही खो जाएगा।





