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आरक्षण पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान, ‘जरूरतमंदों को ही मिले लाभ, बहस जरूरी’

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के कुछ ही दिन बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल उन लोगों के लिए होना चाहिए, जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता है।
आरक्षण पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान, ‘जरूरतमंदों को ही मिले लाभ, बहस जरूरी’

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के कुछ ही दिन बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण केवल उन लोगों के लिए होना चाहिए, जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति शिक्षित है और आर्थिक रूप से सक्षम है, तो उसके लिए आरक्षण की मांग करना उचित नहीं है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर उनका बच्चा मुंबई के एक अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है, तो चंद्रपुर के किसी गरीब बच्चे को ऐसी शिक्षा की अधिक जरूरत है।

सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर समाज और युवाओं से खुली चर्चा की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आरक्षण का सवाल केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस पर कॉलेजों, समाज और हर मंच पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह जानना जरूरी है कि आम जनता इस पर क्या सोचती है, ताकि आरक्षण का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच सके।

आरक्षण पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान

इस दौरान सुप्रिया सुले ने एक अहम सवाल उठाया कि आखिर आरक्षण का आधार क्या होना चाहिए—आर्थिक स्थिति या फिर जाति व्यवस्था? उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच एक सर्वे कराया गया, जिसमें अधिकतर लोग आर्थिक आधार पर आरक्षण के पक्ष में दिखे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी, खासकर जेन जेड के विचार उन्हें प्रेरित करते हैं। यही वजह है कि वह हर हितधारक की राय सुनना चाहती हैं और समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए चर्चा को जरूरी मानती हैं।

गौरतलब है कि सुले का यह बयान महाराष्ट्र में हुए मराठा आरक्षण आंदोलन के ठीक बाद आया है। हाल ही में कार्यकर्ता मनोज जरांगे और उनके समर्थकों ने नौकरियों और शिक्षा में मराठों को आरक्षण देने की मांग को लेकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे। महाराष्ट्र सरकार ने उनकी अधिकांश मांगें मान लीं, जिनमें योग्य मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देना भी शामिल है। इसके बाद इस महीने आंदोलन समाप्त हुआ और ओबीसी समुदाय के लिए आरक्षण से जुड़ी अनिश्चितताओं पर भी विराम लगा। इसी पृष्ठभूमि में सुले का बयान बहस को नई दिशा देता दिख रहा है।