बंगाल फतह का अनोखा जश्न: भाजपा कार्यालय में सांसद ने अपने हाथों से बनाई ‘झालमुड़ी’, कार्यकर्ताओं को खिलाकर मनाई खुशी

कार्यकर्ताओं को झालमुड़ी बांटते हुए सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा, "बंगाल में कमल खिलना हमारे लिए एक बहुत बड़ा दिन है। यह जीत बंगाल की जनता के विश्वास और हमारे देवतुल्य कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का परिणाम है।
Bengal Victory Celebration Mandsaur MP Sudhir Gupta

Bengal Victory Celebration Mandsaur MP Sudhir Gupta

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत  की तरफ बढती भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ‘कमल खिलने’ का जश्न देशभर के पार्टी कार्यालयों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने इस शानदार जीत का जश्न बेहद ही अनोखे और ठेठ बंगाली अंदाज में मनाया। उन्होंने पार्टी कार्यालय में अपने हाथों से मशहूर बंगाली स्नैक ‘झालमुड़ी’ बनाकर कार्यकर्ताओं को खिलाई।

जैसे ही बंगाल में भाजपा की जीत के आंकड़े स्पष्ट होना शुरू हुए , पार्टी कार्यालय में ढोल-नगाड़े बजने लगे और मिठाइयां बंटनी शुरू हो गईं। लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान सांसद सुधीर गुप्ता ने खींचा। उन्होंने जीत की खुशी जाहिर करने के लिए बंगाल के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ को चुना।

उन्होंने खुद एक बड़े बर्तन में मुरमुरे, बारीक कटे प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, उबले आलू, चना, खास मसाले और कच्चा सरसों का तेल मिलाकर बिल्कुल पारंपरिक बंगाली तरीके से झालमुड़ी तैयार की और वहां मौजूद सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को अपने हाथों से परोसी।

क्या बोले सांसद सुधीर गुप्ता

कार्यकर्ताओं को झालमुड़ी बांटते हुए सांसद ने कहा, “बंगाल में कमल खिलना हमारे लिए एक बहुत बड़ा दिन है। यह जीत बंगाल की जनता के विश्वास और हमारे देवतुल्य कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का परिणाम है। बंगाल की जीत का जश्न वहां के पारंपरिक स्वाद के बिना अधूरा था, इसलिए हमने आज झालमुड़ी के साथ इस जीत की मिठास और तीखापन साझा किया है।”

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

सांसद द्वारा खुद झालमुड़ी बनाते और कार्यकर्ताओं को कागज के ठोंगों (कोन) में परोसते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। लोग उनकी सादगी और इस अनूठे सेलिब्रेशन की खूब तारीफ कर रहे हैं।
इस मौके पर झालमुड़ी का स्वाद लेते हुए कार्यकर्ताओं ने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और पार्टी के समर्थन में जमकर नारे लगाए। मिठाइयों के बजाय झालमुड़ी से मुंह का स्वाद बदलकर कार्यकर्ताओं ने बंगाल की संस्कृति के प्रति भी अपना सम्मान व्यक्त किया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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