उपज लेकर मंडी पहुंचे 25 गांव के किसान, सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उड़ी धज्जियां

उपज लेकर मंडी पहुंचे 25 गांव के किसान, सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर उड़ी धज्जियां

मंदसौर। तरुण राठौर। लॉकडाउन (Lockdown) कर्फ्यू के चलते अब तक मंदसौर (Mandsaur) कृषि उपज मंडी बन्द थी। किसानों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन के आदेशानुसार गुरूवार से नीलामी प्रक्रिया चालू की गई। इस नीलामी में 25 गांव के किसान अपनी उपज लेकर मंदसौर मंडी पहुँचे। इस दौरान नीलामी में जमकर सोशल डिस्टेंसिग (Social Distancing) का उलंघन हुआ।

वैसे तो कोरोना (Corona) महामारी के चलते कई दिनों के बाद कृषि उपज मंडी को चालू किये जाने का निर्णय लिया गया था। जिला प्रशासन ने पूर्व में 5 गाँवो के किसानों की उपज को मंडी में लाये जाने का निर्णय लिया था। लेकिन फिर अचानक प्रशासन ने अपने निर्णय को बदलते हुए 25 गांव के किसानों को मंदसौर मंडी में अपनी उपज लेकर बुलाया । जिसका यह नतीजा निकला कि लहसुन मंडी में भीड़ इकट्ठा हो गई और फिर किसान और व्यपारियो के बीच फिजिकल डिस्टेंसिग नही रही। ऐसे में कई लोगों ने तो मुँह पर मास्क तक भी नही लगाये हुए थे। अगर कोई कोरोना से संक्रमित व्यक्ति पहुँचा तो जिले में एक बार फिर कोरोना धमाका होने की संभावना बनेगी।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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