दीपों की रौशनी से रोशन हुआ मंदसौर, गूंजे देशभक्ति के नारे

दीपों की रौशनी से रोशन हुआ मंदसौर, गूंजे देशभक्ति के नारे

मंदसौर। तरुण राठौर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार 5 मार्च को 9 बजे 9 मिनट तक दीप व टार्च की लाइट जलाकर रोशनी करने की अपील की। जिसका लोगों ने पालन करते हुए जय श्री राम के नारों व भारत माता की जयघोष साथ देशभक्ति के गीत बजाते हुए मोहल्ले में इकठ्ठा होकर जमकर आतिबाजी की।

दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के नाम संदेश में अपील की थी कि कोरोना से लड़ने के लिए हमें रविवार 5 मार्च की रात 9 बजे 9 मिनट तक घर की लाइट बन्द करके दीपो व टार्च की लाइट जलाकर रोशनी करे। जिसके बाद आज रविवार को रात नौं बजे मंदसौर जिले में इसका व्यापक असर देखा गया। शहर के लोगों ने रात 9 बजते ही अपने अपने घर की लाइट बुझाई और बालकनी एवं छत पर दिये जलाये। मोहल्ले में इकठ्ठा होकर जमकर फटाके फोड़े। लोगों ने अति उत्साह दिखाते हुए दीपक की संख्या नौ या उससे भी अधिक रखी। जय श्री राम के नारे भी लगाए।इससे माहौल दीपावली जैसा हो गया। लोगों का उत्साह नौ मिनट तक त्योहार जैसा रहा इस दौरान लोगों ने भारत माता की जय का जयघोष किया और देशभक्ति गीत गाये।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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