लॉकडाउन के दिनों में गायों को घास खिलाते हुवे युवा व स्वनो(कुत्तों) को टोस्ट खिलाती युवती

लॉकडाउन के दिनों में गायों को घास खिलाते हुवे युवा व स्वनो(कुत्तों) को टोस्ट खिलाती युवती

मंदसौर। तरुण राठौर।

कोरोना वायरस के 21 दिन के लॉकडाउन में जहां समाजसेवियों ने गरीब और राहगीरों के भोजन की व्यवस्था कर मानव सेवा की मिसाल कायम की है । वही इन दिनों शहर और ग्रामीण इलाकों में घूम रहे पशुओं के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी । इसके बाद कुछ समाजसेवी भी बाजारों में आवारा घूम रहा है पशुओं के लिए भी जीवनदान बनकर सामने आए हैं । मन्दसौर के कुछ युवा मिलकर आवारा मवेशियों के लिए हरी घास की व्यवस्था कर शहर भर के मवेशियों को घास डाल रहे हैं । शुरुआती दौर में इन्होंने शहर घुम रहे मवेशियों के चारा पानी की व्यवस्था करने का बीड़ा उठाया था । लेकिन इनकी सेवा भाव को देखकर शहर के अन्य समाजसेवी भी अब इन्हें सहायता पहुंचा रहे हैं । अपने एक लोडिंग वाहन से युवाओं की एटीएम पूरे शहर में घूम कर जहां भी ने मवेशी दिखाई देते हैं वहां उन्हें चारा पानी करते हैं । इसके साथ ही आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों के लिए दूध और बिस्किट की व्यवस्था भी युवाओं की यह टीम कर रही है। भूखे मर रहे जानवरों के लिए अन्य समाजसेवी भी आगे आकर बाजारों में घूम रहे कुत्तों के लिए बिस्किट पहुंचा रहे हैं । देश में मुश्किल हालातों के बीच इन मुक प्राणियों के लिए मानवता की मिसाल सराहनीय है । जहां लोग अपने भोजन की व्यवस्था में जुटे हैं वहीं इन मुक प्राणियों के लिए समाजसेवी ईश्वर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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