लाखों का अवैध गुटखा बरामद, महंगे दामों पर खपाने की साजिश का पर्दाफाश

लाखों का अवैध गुटखा बरामद, महंगे दामों पर खपाने की साजिश का पर्दाफाश

मुरैना/संजय दीक्षित

मुरैना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गणेश होटल के पास बने सुल्तान राठौर के मकान के तलघर से अवैध रूप से भरा लाखों का गुटखा पकड़ाया है। इसे कोरोना क्राइसिस में मंहगे दामों में खपाया जा रहा था। बता दें कि कोरोना महामारी के समय सरकार द्वारा गुटखे को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है, इसे खाने के बाद इधर उधर थूकने से कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।

पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि लाखों रुपए का माल अवैध रूप से भण्डारण किया गया हैं, जिसे बाजार में खपाने के लिए ले जाया जा रहा हैं।मुखबिर की सूचना से पुलिस ने छापा मार कार्यवाही करते हुए लाखों रुपए का गुटखा जप्त किया हैं। शासन के द्वारा कोरोना क्राइसिस के दौरान गुटखे पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया हैं। गुटखा खाकर थूकने से कोरोना बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, इसके बावजूद भी शहर में अवैध तरीके से गुटखा खपाया जा रहा है। इसी के साथ दो आरोपी भी पकड़े गए हैं।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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