मजिस्ट्रेट ने ओवरलोड वाहनों के चालान काटे, वसूले 45800 रुपए

मजिस्ट्रेट ने ओवरलोड वाहनों के चालान काटे, वसूले 45800 रुपए

संजय दीक्षित//मुरैना। प्रदेश में चल रहे गैर कानूनी कार्यों पर प्रशासन आजकल सख्त नजर आ रही है। बढ़ते अपराधों और गैर कानूनी गतिविधियों पर नकेल कसते हुए आज शनिवार को शहर के कोतवाली चौराहा, नहर के पास और जौरा रोड पर सोलंकी पेट्रोल पंप के पास मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेकिंग शुरू कर दी। जिसे लेकर पूरे बाजार भर में हड़कंप की स्थिति बन गई।

कार्रवाई के दौरान सीजेएम शिल्पा तिवारी, सीजे सचिन भदखारिया, सीजे हर्षिता गुप्ता, सीजे सौम्या, सीजे आरुषि, सीजे शुभा, सीजे डोनाल्ड, सीजे मुड़िया , मोहन सिंह राजावत, हिमांशु अग्रवाल, पुलिस स्टाफ और ट्रैफिक प्रभारी ने वाहनों पर चालान की कार्रवाई की।

गौरतलब है कि शनिवार की सुबह करीब 10 बजे से चेकिंग शुरू की गई और दोपहर 2 बजे तक तीनों जगह पर निरंतर कार्यवाही जारी रही। इस दौरान न्यायाधीशों की टीम ने सड़क से निकलने वाले ओवनलोड वाहनो की चेकिंग की। वाहनों के चालकों से उनके दस्तावेज देखे, जिनके पास दस्तावेज थे वे अपने वाहन को आसानी से ले गए। इनमें से 26 वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान 45 हजार 800 रुपए की जुर्माना राशि वसूल की गई। कार्रवाई के दौरान न्यायाधीशों की टीम में स्कूल बसों को रोककर उनकी चेकिंग करते हुए बच्चों से यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को जाना और बच्चों को यथावत स्कूल में छोड़ने के आदेश दिए। इसके साथ ही नगर निगम और पुलिस के वाहनों की जांच भी की गयी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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