
संसद के मॉनसून सत्र में 19 विधेयकों को बिना किसी चर्चा या विपक्षी विरोध के पारित कर दिया गया। इनमें एक महत्वपूर्ण विधेयक संविधान संशोधन से संबंधित है, जो आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे मंत्रियों को हटाने से जुड़ा है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि बिहार मतदाता सूची विवाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कर्नाटक व महाराष्ट्र में मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों के बीच उत्पन्न अराजकता के कारण ये विधेयक बिना बहस के पास हुए।
संसद ने ऑनलाइन गेमिंग विधेयक को भी मंजूरी दी, जो ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को मान्यता देता है, लेकिन जुआ मंचों और धन-आधारित खेलों पर प्रतिबंध लगाता है। इसके अलावा, मणिपुर से संबंधित दो विधेयक – जीएसटी संशोधन विधेयक व विनियोग संख्या 2 विधेयक – और सरकारी भारतीय प्रबंधन संस्थानों के संचालन से संबंधित एक अन्य विधेयक भी न्यूनतम या बिना विपक्षी योगदान के पारित हुए।
ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा
विपक्ष ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला पर विशेष संसदीय चर्चा का भी अधिकांशतः बहिष्कार किया। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा में दोनों सदनों में व्यापक बहस हुई। इस सत्र में लोकसभा ने 12 और राज्यसभा ने 14 विधेयक पारित किए। सत्र 21 जुलाई को शुरू हुआ था। इसमें पाहलगाम हमले के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई, ऑपरेशन सिंदूर, पर भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले।
विपक्षी सांसदों को लिया आड़े हाथ
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जनता गंभीर बहस की अपेक्षा करती है, न कि तख्तियों और नारों की। उन्होंने कहा कि निरंतर व्यवधान संसद की गरिमा का अपमान हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी आयकर अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा न करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की अनुपस्थिति के कारण दोनों सदनों में ये विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए।
