नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कई मुद्दों पर जमकर घेरा। उन्होंने एआई समिट के दौरान हुए यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई से लेकर एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव के विवाद पर अपनी बात रखी। सिंघवी ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जहां सरकार से सवाल पूछना साजिश और शांतिपूर्ण विरोध करना देशद्रोह माना जाने लगा है।
सिंघवी ने जोर देकर कहा कि अगर कोई सत्ता के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आवाज उठाता है, तो उसे लाठी, मुकदमे और जेल का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भी जिक्र किया, जिन्होंने कहा था कि आज ‘कंप्रोमाइज पीएम’ के राज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भी रोका जा रहा है।
“दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साज़िश बताया जाता है।”- अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस सांसद
AI समिट में प्रदर्शन और पुलिस एक्शन
एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन का बचाव करते हुए सिंघवी ने कहा कि भारत मंडपम कोई प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि एक पब्लिक प्रॉपर्टी है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जवाबदेही मांगता है तो वो देशद्रोह नहीं है। पुलिस अफसर पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था। इन बेचारे बच्चों ने ऐसा कोई काम नहीं किया है।”
उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लगाई गई गंभीर धाराओं पर हैरानी जताते हुए कहा, “ऐसी धाराएं हैं कि कहीं मैं आतंकवाद, देशद्रोह पढ़ रहा हूं, जबकि ऐसा कुछ नहीं किया गया। मैंने विरोध किया लेकिन मैंने पुलिस को कहां अवरुद्ध किया?” सिंघवी ने इस कार्रवाई को बेहद चिंताजनक करार दिया।
NCERT किताब विवाद पर भी घेरा
अभिषेक मनु सिंघवी ने NCERT की किताब में विवादित चैप्टर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में कोर्ट में भी पेश हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारा विरोध इस बात पर नहीं है कि आप ब्यूरोक्रेसी से प्रश्न नहीं पूछ सकते। हमारा मुद्दा है कि ब्यूरोक्रेसी में, राजनीतिक दलों में क्या हो रहा है? उस पर कुछ नहीं बोलते लेकिन न्यायपालिका को उठाकर आप 8वीं कक्षा के बच्चों को सिखाना चाहते हैं।”
सिंघवी ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए कई पुराने मामलों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से त्रस्त युवाओं ने आवाज उठाई तो उन्हें जवाब में लाठियां मिलीं। देश की गौरवशाली महिला पहलवानों ने जब बीजेपी नेता के खिलाफ जांच की मांग की तो उनके आंदोलन को कुचला गया। उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक चलन है, जहां न्याय की मांग को व्यवस्था के लिए असुविधा मानकर दबा दिया जाता है।





