SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बोलीं ममता बनर्जी, “हमें न्याय नहीं मिल रहा, निशाने पर बंगाल”

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
Mamata Banerjee Supreme Court SIR Case

चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में कराई जा रही SIR के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुन्विया हुई,  इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। उन्होंने इस मामले में खुद मौखिक रखीं हालाँकि उनकी तरफ से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने क़ानूनी दलीलें रखीं, सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी निर्धारित की है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था।

ममता का आरोप सिर्फ नाम हटाने हो रही SIR 

पीठ के सामने ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

ममता बनर्जी ने बताई SIR की खामियां  

ममता बनर्जी ने कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को ‘गलत मानचित्रण’ बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अदालत को बताया कि इस अदालत के आधार कार्ड को मान्यता देने के निर्देश के बाद बंगाल के लोगों को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं, लेकिन केवल बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है।

एक व्यापक उद्देश्य के लिए लड़ रही हूँ : ममता 

सीएम ममता बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि वह इसी राज्य की निवासी हैं उन्होंने अपनी बात रखने के लिए न्यायालय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जब न्याय ‘बंद दरवाजों के पीछे पुकार रहा होता है’, तो ऐसा लगता है कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कोर्ट को बताया कि  चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन नतीजा नहीं निकला। ममता बनर्जी ने खुद को बंधुआ मजदूर बताते हुए जोर दिया कि वह किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि एक व्यापक उद्देश्य के लिए लड़ रही हैं।

32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकार

एडवोकेट श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। दीवान ने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

9 फरवरी को सुनवाई, सीएम ने जताया आभार

CJI ने सभी दलीलें सुनने के बाद कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है, उन्होंने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी तब तक राज्य को ग्रुप बी के उन अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करनी चाहिए जिन्हें कार्यमुक्त किया जा सकता है और उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। सीएम ममता बनर्जी ने न्यायालय से जनता के अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया और पीठ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को बहस का अवसर देने के लिए शुभकामनाएं दीं और सर्वोच्च न्यायालय से लोकतंत्र को बचाने का आग्रह किया।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews