कांग्रेस के वरिष्ठ और मुखर नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपने बयान से पार्टी के भीतर और विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सलाह दी है कि राहुल गांधी को गठबंधन के नेतृत्व की भूमिका से हट जाना चाहिए और यह जिम्मेदारी किसी क्षेत्रीय नेता को सौंप देनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब गठबंधन में नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही खींचतान जारी है।
अय्यर का मानना है कि इस कदम से गठबंधन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव जैसे नेता इस भूमिका के लिए अधिक उपयुक्त हो सकते हैं क्योंकि वे गठबंधन को चलाने के लिए अधिक समय दे पाएंगे।
‘ममता दीदी के बिना INDIA अधूरा’
मणिशंकर अय्यर ने अपने तर्क को विस्तार से समझाते हुए क्षेत्रीय नेताओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख चेहरे हैं जो इस पद को संभाल सकते हैं और गठबंधन को प्रभावी ढंग से चला सकते हैं।
“ममता दीदी के बिना INDIA अलायंस का ‘I’, ‘N’, ‘D’, ‘I’ और सब निकल जाएगा क्योंकि ममता बनर्जी ही इस गठबंधन की नेता हैं और साथ-साथ और दो-चार और लोग हैं जो इस पद को हासिल कर सकते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि बजाय राहुल गांधी इसी पद पर रहने की कोशिश करें, किसी और को, जो छोटी पार्टियों का है… स्टालिन हों, ममता दीदी हों, अखिलेश हों, तेजस्वी हों या कोई और है, और कोई संभाले तो उनके पास ज्यादा टाइम रहेगा गठबंधन को चलाने के लिए।”- मणिशंकर अय्यर, कांग्रेस नेता
उनका यह बयान सीधे तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़ा करता है, जो अब तक गठबंधन का मुख्य चेहरा माने जा रहे थे।
बंगाल कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया
मणिशंकर अय्यर की इस टिप्पणी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है, खासकर कांग्रेस की प्रदेश इकाई में। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने अय्यर के बयान को सिरे से खारिज करते हुए उन पर पलटवार किया है।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव सुमन रॉय चौधरी ने कहा कि अय्यर लंबे समय से पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूर हैं और उनका यह बयान पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है। उन्होंने अय्यर पर तीखा हमला करते हुए कहा, “मणिशंकर जी क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी पर्दे के पीछे बीजेपी की कठपुतली की तरह काम करती हैं, जिसके खिलाफ INDIA ब्लॉक लड़ रहा है? मुझे नहीं लगता कि पार्टी से दूर रहने के बाद कांग्रेस पार्टी का कोई भी फैसला लेने में आपका कोई हिस्सा है।”
यह विवाद INDIA गठबंधन के भीतर मौजूद दरारों को और गहरा कर सकता है, जहां ममता बनर्जी पहले ही कांग्रेस से दूरी बनाए हुए हैं और अखिलेश यादव व तेजस्वी यादव जैसे नेता भी कई मौकों पर अपनी स्वतंत्र राय रखते आए हैं।






