दिल्ली: प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और पुलिस को भेजा नोटिस, पढ़ें खबर

दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा के आरोपों को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
Delhi High Court

राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से हुई बेरहम हिंसा के मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस गंभीर मसले पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैम फुटेज और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है, ताकि भविष्य में जांच के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध रहें।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत सरकार के कानूनी अधिकारी, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) राजू से तीखे सवाल पूछे। अदालत ने पूछा कि ‘आप कैसे कह सकते हैं कि यह याचिका केवल पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई है?’ पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि जब सर्वोच्च न्यायालय का एक स्पष्ट फैसला पहले से मौजूद है और इतनी बड़ी संख्या में लोग इस घटना में शामिल हैं, तो ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करानी चाहिए? न्यायालय ने इस तर्क पर अपनी असहमति व्यक्त की, जो यह दर्शाता है कि अदालत इस मामले की गंभीरता को स्वीकार कर रही है।

उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार की दलील

इस मामले में केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था।’ सरकार ने तर्क दिया कि प्रदर्शन में शामिल कुछ तत्वों ने निश्चित रूप से हिंसा का सहारा लिया था, जिसके कारण स्थिति बिगड़ गई। सरकार ने यह भी दावा किया कि ‘ये याचिकाएं केवल पब्लिसिटी हासिल करने के उद्देश्य से दायर की गई हैं।’ अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने अदालत को यह भी बताया कि जिन लोगों के साथ मारपीट का आरोप लगाया जा रहा है, उनमें से किसी ने भी न तो कोई प्राथमिकी दर्ज कराई है और न ही कोई अलग से याचिका दायर की है। यह सरकार की ओर से मामले को कमजोर करने का प्रयास था।

11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

यह पूरा मामला गत 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा और पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से जुड़ा है। इस घटना के संबंध में कई जनहित याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की गई हैं, जिन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने अपने नोटिस का जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद, याचिकाकर्ता को भी अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मिलेगा। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 11 सितंबर को निर्धारित की गई है, जिस दिन अदालत में आगे की कार्यवाही होगी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आयोजन किया था। इस मार्च में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी के जंतर-मंतर, संसद भवन और कनॉट प्लेस के आसपास के इलाकों में इकट्ठा हुए थे। शुरुआत में शांतिपूर्ण प्रतीत होने वाला यह प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया था। प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े। इस पूरी घटना के कई सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं, जो उस दिन की परिस्थितियों को दर्शाते हैं। इन फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया है, जो जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। न्यायालय का यह सख्त रुख कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा दोनों के महत्व को रेखांकित करता है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews