प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो अवैध कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाता था। ED ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में ₹34 लाख की बेहिसाब नकदी, डिजिटल उपकरण और करोड़ों रुपये की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
यह पूरा नेटवर्क खुद को टेक्निकल सपोर्ट सर्विस बताकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था। जालंधर जोनल ऑफिस की टीम ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की है। ED ने यह जांच CBI द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी, जिसे अमेरिकी जांच एजेंसी FBI से मिली खुफिया जानकारी के बाद दर्ज किया गया था।
FBI की सूचना पर एक्शन, ऐसे चलता था ठगी का खेल
जांच के मुताबिक, आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर खुद को टेक्निकल सपोर्ट टीम का सदस्य बताते थे। बातचीत के दौरान वे पीड़ितों का संवेदनशील डेटा हासिल कर लेते थे। इसके बाद, उन्हें अमेरिका की इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) की कार्रवाई का डर दिखाकर ब्लैकमेल किया जाता था।
पीड़ितों पर डर और दबाव बनाकर उनसे क्रिप्टोकरेंसी अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों डॉलर की ठगी की है। छापेमारी के दौरान जॉनी, दक्षय सेठी, और गौरव वर्मा समेत कई अन्य आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली गई।
अवैध कॉल सेंटर और शेल कंपनियों का जाल
ED की जांच में सामने आया कि ‘डिजी कैप्स द फ्यूचर ऑफ डिजिटल’ नाम से एक अवैध कॉल सेंटर चलाया जा रहा था, जिसमें 36 कर्मचारी काम करते थे। इस पूरे नेटवर्क की देखरेख जॉनी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा कर रहे थे।
ठगी से हासिल की गई रकम को पहले अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए घुमाया जाता था ताकि उसकी पहचान छिपाई जा सके। इसके बाद, इस पैसे को ब्लिस इन्फ्राप्रॉपर्टीज एलएलपी और ब्लिस इंफ्रावेंचर्स एलएलपी जैसी शेल कंपनियों में डालकर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।
रियल एस्टेट में निवेश, विदेश में भी प्रॉपर्टी के सबूत
एजेंसी को पता चला है कि इस अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में निवेश किया गया। जांच में भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी संपत्तियां खरीदने के सबूत मिले हैं। छापेमारी के दौरान ₹34 लाख नकद के अलावा कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अचल संपत्तियों से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।
ये सभी सबूत आरोपियों को सीधे तौर पर साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हैं। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।





