हाउस नंबर 0 और एक जैसे नाम कैसे? राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब

चुनाव आयोग ने बिहार में 22 लाख मतदाताओं की मौत के दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि ये मौतें पिछले छह महीनों में हुईं।
हाउस नंबर 0 और एक जैसे नाम कैसे? राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब

चुनाव आयोग ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में दोहराव का मतलब धोखाधड़ी नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया जल्दबाजी में नहीं की जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी के दावों को गलत विश्लेषण करार देते हुए सात दिनों के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने या राष्ट्र से माफी मांगने की चुनौती दी। कुमार ने बताया कि लाखों मतदाताओं के पते में घर का नंबर शून्य इसलिए होता है, क्योंकि कई पंचायत क्षेत्रों में घरों को नंबर नहीं दिए गए हैं।

राहुल गांधी ने 7 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के उदाहरण देकर मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि दोहरे नाम, शून्य घर नंबर और छोटे घरों में दर्ज दर्जनों मतदाता धोखाधड़ी का संकेत हैं। जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि दोहरे नाम होने का मतलब दो जगह वोट देना नहीं है, क्योंकि यह आपराधिक कृत्य है। आयोग ने सबूत मांगते हुए कहा कि वह सभी धर्मों और वर्गों के मतदाताओं के साथ निष्पक्षता से खड़ा है।

22 लाख मतदाताओं की मौत के दावे

चुनाव आयोग ने बिहार में 22 लाख मतदाताओं की मौत के दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि ये मौतें पिछले छह महीनों में हुईं। कुमार ने स्पष्ट किया कि ये मौतें पिछले 20 वर्षों में दर्ज नहीं हुई थीं और एसआईआर का उद्देश्य ऐसी गलतियों को सुधारना है। उन्होंने बताया कि भारत में 90-100 करोड़ मतदाताओं की सूची की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कहा कि 1 सितंबर तक बिहार के ड्राफ्ट मतदाता सूची में गलतियों के लिए शिकायतें स्वीकार की जाएंगी।

‘बिहार में एसआईआर जल्दबाजी में हो रहा’

चुनाव आयोग ने यह भी खारिज किया कि बिहार में एसआईआर जल्दबाजी में हो रहा है। कुमार ने कहा कि मतदाता सूची को हर चुनाव से पहले ठीक करना कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया 24 जून से शुरू हुई और 20 जुलाई तक पूरी हुई। साथ ही, उन्होंने सभी 12 राजनीतिक दलों से अपील की कि वे ड्राफ्ट सूची में खामियां बताएं ताकि सुधार किया जा सके। आयोग ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची तैयार करना और वोट डालना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और वोट चोरी संभव नहीं है।

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