नई दिल्ली: देश में चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार और समन्वय को लेकर एक बड़ी पहल हुई है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और सभी राज्यों के चुनाव आयुक्तों (SECs) के बीच आयोजित एक राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन में ‘राष्ट्रीय घोषणा-2026’ को सर्वसम्मति से अपना लिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एक त्रुटिहीन मतदाता सूची को मूल आधार बताया गया।
सम्मेलन का मुख्य जोर इस बात पर था कि कुशल और पारदर्शी तरीके से चुनावों का संचालन ही लोकतंत्र को सशक्त बनाता है। इसी दिशा में आयोग ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर की चुनावी मशीनरी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
संसाधनों के साझा इस्तेमाल पर जोर
राष्ट्रीय और संवैधानिक हितों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने एक अहम सुझाव दिया। इसके तहत ECINET, EVM, मतदाता सूची और IIIDEM (भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान) जैसे विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे को सभी राज्य चुनाव आयोगों के साथ साझा करने की बात कही गई।
इसका मकसद एक ऐसी व्यवस्था और कानूनी ढांचा तैयार करना है जो परस्पर स्वीकार्य हो और सभी संभावित चुनावी प्रक्रियाओं के लिए एक समान मानक स्थापित कर सके। यह कदम न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि चुनावी प्रक्रियाओं में एकरूपता भी लाएगा।
कानूनों में तालमेल और वार्षिक बैठक
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि भारत निर्वाचन आयोग और SECs मिलकर काम करेंगे ताकि पंचायत और नगर निकायों के चुनावों से जुड़े कानूनों तथा संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों से संबंधित कानूनों के बीच तालमेल बिठाया जा सके।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने यह भी प्रस्ताव रखा कि इस तरह का राष्ट्रीय राउंड टेबल सम्मेलन हर साल आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन विशेष रूप से ECI की अध्यक्षता में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के साथ होगा। सम्मेलन में SECs द्वारा दिए गए सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक संयुक्त टीम का गठन भी किया जाएगा, जिसका नेतृत्व ECI के संबंधित उप चुनाव आयुक्त (DECs) करेंगे। यह टीम अगले तीन महीनों के भीतर भविष्य की दिशा तय करने के लिए आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।






