
Himachal Pradesh Old Pension Scheme: जनवरी में हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आश्वासन मिलने के बावजूद अबतक पुरानी पेंशन योजना लागू ना होने के चलते बिजली बोर्ड के कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है।कर्मचारी संगठनों ने लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द से जल्द उनकी मांग को नहीं माना गया, तो वह आंदोलन की राह अख्तियार करेंगे।
जनवरी में दिया था सीएम ने आश्वासन, अबतक नहीं मिला ओपीएस का लाभ
- दरअसल, सत्ता में आने के बाद प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुख्खू सरकार ने प्रदेश के अन्य विभागों के सरकारी कर्मचारियों के लिए ओपीएस अप्रैल 2023 माह में ही बहाल कर दी थी और कईयों रिटायर कर्मियों और पेंशनरों को इसका लाभ भी मिलना शुरू हो गया है, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद अबतक बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला है, जबकी बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन प्रदेश सरकार की तर्ज पर वर्ष 1974 से है।
- इसको लेकर जनवरी में राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी और इंजीनियर के संयुक्त मोर्चे ने आंदोलन की भी किया था।इस दौरान सीएम ने कर्मचारियों संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर आश्वासन दिया था कि जल्द ही ओपीएस का लाभ मिलेगा, जिसके बाद कर्मचारियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन अब तक ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली नहीं हो सकी है।
पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों ने राज्य सरकार को दी ये चेतावनी
- सीएम सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश स्टेट इलैक्ट्रीसिटी बोर्ड इम्प्लाइज एंड इंजीनियर के ज्वाइंट फ्रंट के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया था कि फरवरी से बिजली कर्मचारियों को OPS का लाभ दिया जाएगा लेकिन अब करीब 3 महीने का समय बीतने को है और अबतक कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है।इससे कर्मचारियों में आक्रोश है।तकनीकी कर्मचारी संघ ने मांग की है आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले प्रदेश सरकार बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन बहाली की अधिसूचना जारी करे।
- कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार को चेताया है कि अगर जल्द से जल्द उनकी मांग को नहीं माना गया, तो वह आंदोलन की राह का रूख करेंगे। अगर अधिसूचना जारी होती है तो बिजली बोर्ड के 6600 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। ।वर्तमान में बोर्ड में 6500 कर्मचारी नई पेंशन में हैं। पुरानी पेंशन लागू करने से बोर्ड पर और कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
जानिए क्या अंतर है OPS और NPS में
- OPS में सरकारी कर्मचारी के रिटायर होने के बाद आखिरी मूल वेतन और महंगाई भत्ते की आधी रकम बतौर पेंशन ताउम्र सरकार के राजकोष से दी जाती है।NPS एक कंट्रीब्यूटरी स्कीम है, जिसमें कर्मचारियों को अपने वेतन का दस प्रतिशत हिस्सा देना होता है। सरकार कर्मचारी के एनपीएस खाते में 14% भाग डालती है।
- OPS में हर साल दो बार महंगाई भत्ता भी बढ़कर मिलता है,पेंशन पाने वाले सरकारी कर्मचारी की मौत होने पर उसके परिवार के पेंशन दिए जाना भी ओपीएस में शामिल हैं।OPS में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी मिलती है।
- NPS में रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी का कोई स्थायी प्रावधान नहीं है।न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में 6 महीने के उपरांत मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) लागू नहीं होता है।NPS में सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके परिजनों को कुल वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है।
- नई पेंशन स्कीम के तहत सेवानिवृत्ति पर पेंशन पाने के लिए एनपीएस फंड का 40 फीसदी निवेश करना होता है। सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती।एनपीएस शेयर बाजार पर आधारित है। इसमें महंगाई भत्ते का प्रावधान शामिल नहीं है।
- OPS के विपरीत नई पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट पर शेयर बाजार के अनुसार जो भी पैसा मिलेगा,आपको उसपर टैक्स देना होता है।OPS में कर्मचारी के रिटायरमेंट पर GPF के ब्याज पर उसे किसी प्रकार का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता।
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Pooja Khodani
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