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नोएडा में फिर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, समर्थन में आये राहुल गांधी, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Written by:Atul Saxena
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सोमवार को हुए उपद्रव को देखते हुए मंगलवार को नोएडा में कई कंपनियों ने अपनी फैक्ट्री और ऑफिस बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, कुछ शांतिपूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।
नोएडा में फिर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, समर्थन में आये राहुल गांधी, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Rahul Gandhi

वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर कल नोएडा में हुआ हिंसक प्रदर्शन आज एक बार फिर दिखाई दिया, फैक्ट्री श्रमिक फेज 2 में भारी संख्या में सड़कों पर दिखाई दिए उन्होंने पत्थरबाजी कर कई वाहनों के ऑफिसों में तोड़फोड़ की, उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा इस दौरान पुलिस के साथ भी मजदूरों की झड़प हुई हालात को काबू में करने के प्रयास किये जा रहे हैं उधर राहुल गांधी इन श्रमिकों के समर्थन में आ गए हैं उन्होंने मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग को जायज बताया है।

सोमवार को नोएडा भारी बवाल हुआ अचानक फैक्ट्री श्रमिक सड़कों पर आ गए उन्होंने पत्थर बाजी की कई गाड़ियों में आग लगा दी तोड़फोड़ की, श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं उनका कहना है कि जो मजदूरी उन्हें मिलती है उसमें बढ़ती महंगाई के चलते गुजारा संभव नहीं है, फैक्ट्री प्रबंधन 12-12 घंटे काम कराता है लेकिन उसके हिसाब से मजदूरी कम देता है इसलिए इसे बढाया जाए, हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बना दी जिसे इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन आज मंगलवार को फिर प्रदर्शनकारी सड़कों पर आ गए उधर सोमवार की हिंसा को देखते हुए आज कई कम्पनियों ने अपने ऑफिस और फैक्ट्री आज बंद रखने का फैसला किया है हालांकि, कुछ शांतिपूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

मजदूरों के समर्थन में आये राहुल गांधी 

अब इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी  श्रमिकों के समर्थन में आ गए हैं, राहुल गांधी ने X पर लिखा- ” कल नोएडा की सड़कों पर जो कुछ हुआ, वह इस देश के श्रमिकों की अंतिम पुकार थी उनकी हर आवाज अनसुनी कर दी गई, जो अंतहीन गुहारों से थक चुके थे। राहुल गांधी ने लिखा- नोएडा में एक श्रमिक की मासिक तनख्वाह 12,000 रुपये है, किराया 4,000-7,000 रुपये है। जब तक उसे 300 रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है, तब तक मकान मालिक किराया 500 रुपये प्रति वर्ष बढ़ा देता है।”

राहुल गांधी के लिखा- “जब तक वेतन महंगाई के बराबर नहीं हो जाता, यह बेलगाम महंगाई उनकी जिंदगी को घुटन से भर देती है, उन्हें कर्ज के अथाह सागर में डुबो देती है यही “विकसित भारत” की सच्चाई है। एक महिला कर्मचारी ने कहा, “गैस की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन हमारा वेतन नहीं बढ़ रहा है। गैस संकट के दौरान इन लोगों ने घर में चूल्हा जलाने के लिए शायद 5,000 रुपये का सिलेंडर खरीदा होगा।”

उद्योगपतियों के बहाने पीएम मोदी पर निशाना 

उन्होंने कहा यह सिर्फ नोएडा की बात नहीं है और न ही सिर्फ भारत की। दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला ठप हो गई है। लेकिन अमेरिका के टैरिफ युद्ध, वैश्विक मुद्रास्फीति, आपूर्ति श्रृंखलाओं का टूटना इन सबका बोझ मोदी जी के “मित्र” उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा है।”

राहुल गांधी ने लिखा- “सबसे ज्यादा प्रभावित दिहाड़ी मजदूर हैं, जो सिर्फ अपनी कमाई से ही अपना पेट भर पाते हैं। वह मजदूर, जिसका किसी युद्ध से कोई लेना-देना नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई वह बस काम करता रहा, चुपचाप। बिना किसी शिकायत के और अपने हक की मांग करने पर उसे क्या मिलता है? दबाव और दमन।”

मैं हर मजदूर के साथ खड़ा हूँ : राहुल गांधी 

श्रम कानूनों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने लिखा- “एक और महत्वपूर्ण मुद्दा, मोदी सरकार ने जल्दबाजी में बिना किसी परामर्श के नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताएं लागू कर दीं, जिससे काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन कर दिए गए। वह मजदूर जो प्रतिदिन 12-12 घंटे खड़ा रहता है, फिर भी अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए कर्ज लेता है, क्या उसकी मांग अनुचित है? और वह व्यक्ति जिसके अधिकारों का प्रतिदिन हनन हो रहा है क्या यह “विकास” है? नोएडा का मजदूर 20,000 रुपये की मांग कर रहा है। यह लालच नहीं है यह उसका अधिकार है, उसके जीवन का एकमात्र आधार है। मैं ऐसे हर मजदूर के साथ खड़ा हूं जो इस देश की रीढ़ हैं, फिर भी इस सरकार ने उन्हें बोझ बना दिया है।”

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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