
एक बार फिर सरकार की ओर से फास्टैग के नियमों में बदलाव किया गया है। अब अगर कोई गाड़ी बिना वैलिड और एक्टिव फास्टैग के टोल प्लाजा को क्रॉस करती है, तो उसे गाड़ी की 2 गुना टोल फीस देनी होगी। यानी एक गलती का दो गुना टोल फीस का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा अगर आप यूपीआई से पेमेंट करने का ऑप्शन चुनते हैं, तो इसके लिए भी आपको 1.25 गुना ज्यादा फीस पे करनी पड़ेगी। यह फीस व्हीकल कैटेगरी के हिसाब से लागू की जाएगी। वहीं, सरकार की ओर से जारी किए जा रहे इन नियमों को 15 नवंबर से लागू कर दिया जाएगा।
सरकार की ओर से यह कदम टोल कलेक्शन को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि इससे टोल वसूली में पारदर्शिता आएगी और नेशनल हाईवे पर यात्रियों के लिए सफर को आसान बनाया जा सकेगा। इसके अलावा, यह नियम डिजिटल पेमेंट को भी बढ़ावा देंगे।
हाल ही में किया गया था यह बदलाव
जानकारी दें कि हाल ही में सरकार द्वारा फास्टैग के नियमों में बदलाव किया गया था। 15 अगस्त से 1 साल के लिए फास्टैग सर्विस लॉन्च की गई थी, जिसके तहत एक पास बनाया जा सकता है जिसकी कीमत ₹3000 है और 1 साल के लिए यह पास वैलिड रहेगा। इस पास के जरिए यूजर्स 200 बार टोल को क्रॉस कर सकेंगे। यानी ₹3000 के पास में 200 बार बिना टोल दिए इन गाड़ियों को गुजरने की अनुमति होगी। सरकार द्वारा यह कदम नेशनल हाईवे पर बार-बार टोल प्लाजा पर रुकने और रिचार्ज करने की झंझट को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
जानिए किन रास्तों पर काम करेगा यह पास?
हालांकि, सरकार द्वारा जारी किए गए पास की योग्यता सिर्फ नेशनल हाईवे और नेशनल एक्सप्रेसवे पर ही रहेगी। यानी अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे रूट पर यह पास मान्य रहेगा। जबकि स्टेट हाईवे, नगर पालिका टोल सब-कॉरपोरेशन या प्राइवेट एक्सप्रेसवे जैसे यमुना एक्सप्रेसवे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे या आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर यह काम नहीं करेगा।
जिन लोगों का ट्रैवल बार-बार होता है और उन्हें टोल भरना पड़ता है, उनसे निजात पाने के लिए सरकार द्वारा यह पास सिस्टम जारी किया गया है। इस पास के जरिए हर टोल पर लगभग ₹35 की बचत होती है और ब्लैकलिस्ट होने की चिंता भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा, बार-बार रिचार्ज की झंझट से भी छुटकारा मिलता है और 60 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली समस्या भी सुलझ जाती है।
4 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

