
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर लगाए गए 50% टैरिफ ने भारत के किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की है। ये टैरिफ, जो 60.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से कपड़ा, समुद्री भोजन, रत्न, आभूषण और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इससे भारत की जीडीपी वृद्धि में 0.4-0.6% की कमी आ सकती है, जिससे तटीय आजीविका और एमएसएमई इकाइयां जोखिम में हैं। विशेष रूप से झींगा जैसे समुद्री निर्यात की कीमतें 0.60-0.70 डॉलर प्रति किलोग्राम तक गिर गई हैं, जिससे किसानों और छोटे निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संकट को एक राजनीतिक अवसर में बदल दिया है। अपनी हालिया रैलियों और स्वतंत्रता दिवस के भाषण में उन्होंने किसानों और छोटे उद्यमियों को राष्ट्र का अन्नदाता बताते हुए उनकी रक्षा का वादा किया। उन्होंने कहा, “मोदी किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए दीवार की तरह खड़ा रहेगा।” 2021 के कृषि कानूनों के विरोध के बाद पैदा हुई नाराजगी को कम करने के लिए मोदी ने इस टैरिफ युद्ध को अमेरिकी दबाव के खिलाफ राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनाया है, जिससे ग्रामीण मतदाताओं का समर्थन फिर से हासिल करने की कोशिश की है।
संकट का जवाब दिया
मोदी सरकार ने नीतिगत कदमों के साथ इस संकट का जवाब दिया है। 15 अगस्त 2025 को जीएसटी सुधारों की घोषणा की गई, जिसमें स्लैब को चार से घटाकर दो कर दिया गया जिससे किसानों, महिलाओं और एमएसएमई के लिए आवश्यक वस्तुओं पर कर कम होगा। इसके अलावा, आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत उर्वरक, ईवी बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। भारत ने 24 जुलाई को यूके के साथ एक व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता भी किया, जिससे निर्यात बाजारों में विविधता आएगी और किसानों व एमएसएमई को लाभ होगा।
रूसी तेल खरीद को दंडित करने का प्रयास
ट्रंप के टैरिफ भारत के रूसी तेल खरीद को दंडित करने का प्रयास हैं, लेकिन मोदी ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम टैरिफ की मांग को ठुकरा दिया है। यह रुख भारत की संप्रभुता और घरेलू हितों को प्राथमिकता देता है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि भारत की संरचनात्मक कमजोरियां, जैसे लॉजिस्टिक्स और श्रम बाजारों में सुधार की कमी, इस संकट का पूर्ण समाधान नहीं करतीं। फिर भी, मोदी की रणनीति न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक भी है, जो उन्हें ग्रामीण भारत और छोटे उद्यमियों के संरक्षक के रूप में स्थापित करती है।
