
भारत ने 2024-25 में रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड 150590 करोड़ रुपये का मूल्य हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18% की वृद्धि दर्शाता है। यह उपलब्धि नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के उदारीकरण के कारण संभव हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने वाला कदम बताया, जो भारत को आयात पर निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भरता और निर्यात की दिशा में ले जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के वार्षिक रक्षा निर्यात का है।
रक्षा क्षेत्र में यह उछाल डीएपी (रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया), iDEX (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार) और ADITI जैसे सुधारों का परिणाम है। iDEX ने 300 से अधिक स्टार्टअप्स और एमएसएमई को समर्थन दिया, जबकि SRIJAN पोर्टल के माध्यम से 14000 से अधिक आयातित वस्तुओं को स्वदेशी बनाया गया। पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट (PILs) के तहत 5500 से अधिक रक्षा घटकों को स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य है, जिसमें से 3000 से अधिक पहले ही स्वदेशी हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा औद्योगिक गलियारों (DICs) ने 8,658 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है।
कैसे बन गया रिकॉर्ड
2024-25 में भारत के रक्षा निर्यात ने 23622 करोड़ रुपये (2.76 बिलियन डॉलर) का रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले वर्ष से 12% अधिक और 2016 की तुलना में 15 गुना वृद्धि है। इसमें बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर Do-228 विमान, चेतक हेलीकॉप्टर और हल्के टॉरपीडो शामिल हैं। निजी क्षेत्र ने 15233 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (DPSUs) ने 8389 करोड़ रुपये का निर्यात किया। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी रक्षा प्रणालियों जैसे आकाश और OSA-AK की क्षमता को प्रदर्शित किया, जो पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइल खतरों को निष्प्रभावी करने में सफल रहे।
करोड़ों रुपये का बजट आवंटित
2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को 6,81,210.27 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें 75% आधुनिकीकरण बजट (111544 करोड़ रुपये) भारतीय कंपनियों से खरीद के लिए है। 2024-25 में 209050 करोड़ रुपये के 193 अनुबंधों में से 81% भारतीय कंपनियों को दिए गए, जिसमें 156 प्रचंड हेलीकॉप्टर और 307 ATAGS तोपें शामिल हैं। ये कदम भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित कर रहे हैं, जिससे 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य मजबूत हो रहा है।
