‘1991 में धोखाधड़ी के कारण हुई हार’, सिद्धारमैया के पुराने बयान से कैसे कांग्रेस हो गई असहज

भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि सिद्धारमैया, जो कभी कांग्रेस की वोट चोरी के खिलाफ लड़े थे, आज उसी पार्टी के मुख्यमंत्री हैं और वोट अधिकार रैली का नेतृत्व कर रहे हैं।
‘1991 में धोखाधड़ी के कारण हुई हार’, सिद्धारमैया के पुराने बयान से कैसे कांग्रेस हो गई असहज

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के एक पुराने बयान ने कांग्रेस पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया है। सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 1991 के लोकसभा चुनाव में उनकी हार धोखाधड़ी के कारण हुई थी। उस समय वे जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के उम्मीदवार थे और कोप्पल सीट से कांग्रेस के बसवराज पाटिल अनवारी के खिलाफ चुनाव लड़े थे। अनवारी ने 2.41 लाख वोट हासिल कर 11200 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। सिद्धारमैया ने दावा किया कि 22243 वोटों को गलत तरीके से खारिज किया गया, जिसके कारण उनकी हार हुई।

सिद्धारमैया ने उस समय कर्नाटक हाई कोर्ट में मामला दायर कर अनवारी की उम्मीदवारी को अवैध ठहराया था क्योंकि अनवारी को पहले दल-बदल के आधार पर लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया था। उनके इस बयान को भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ हथियार बनाया, जो हाल ही में बिहार चुनाव से पहले वोटर फ्रॉड के आरोप लगा रही है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि सिद्धारमैया, जो कभी कांग्रेस की वोट चोरी के खिलाफ लड़े थे, आज उसी पार्टी के मुख्यमंत्री हैं और वोट अधिकार रैली का नेतृत्व कर रहे हैं।

कांग्रेस पर निशाना साधा

भाजपा के कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोका ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और पूर्व कांग्रेस नेता सीएम इब्राहिम के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया की बदामी सीट पर 3000 वोट खरीदने का आरोप लगाया था। सिद्धारमैया ने उस चुनाव में भाजपा के बी. श्रीरामुलु को केवल 2,000 वोटों से हराया था। भाजपा सांसद लहार सिंह सिरोया ने चुनाव आयोग से इस दावे की जांच की मांग की है।

30 साल पुरानी बात

कांग्रेस ने सिद्धारमैया के बयान को कम महत्व देते हुए कहा कि भाजपा 30 साल पुरानी बात को अनावश्यक रूप से उछाल रही है। शिवाजीनगर के विधायक रिजवान अर्शद ने कहा कि सिद्धारमैया का बयान उस समय के जेडीएस विधायकों के बीच के मुद्दों से संबंधित था, लेकिन अब चुनाव आयोग पर भाजपा का नियंत्रण है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस बिहार में होने वाले चुनाव से पहले भाजपा और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

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