सुप्रीम कोर्ट में CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर ने कहा “न कोई खेद न कोई डर”, बोले- सनातन धर्म के अपमान पर हुए आहत

उन्होंने कहा कि इन्हीं चीफ जस्टिस का दूसरे धर्म के केस पर अलग रवैया होता है। उन्होंने हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन की जमीन पर विशेष समुदाय के कब्जे पर स्टे लगा दिया। वहीं नूपुर शर्मा के बयान पर कोर्ट ने कहा कि आपने माहौल खराब किया। उन्होंने कहा कि जब हमारे सनातन धर्म से जुड़ा मामला आता है तो उसपर वो कोई ऐसा ऑर्डर पास करते चले आ रहे हैं जिससे मैं बहुत दुखी हूं।
Rakesh Kishore

Rakesh Kishore Shoe Attack

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। ये कृत्य करने वाले 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने इसे ‘सनातन धर्म के अपमान’ के खिलाफ प्रतिक्रिया बताया है। इसी के साथ उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें इसका कोई खेद नहीं है।

इस घटना के बाद किशोर को गिरफ्तार किया गया था लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया। हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस घटना की निंदा की है और इसे न्यायपालिका पर हमला करार देते हुए। वहीं इस घटना ने जातिगत भेदभाव को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

राकेश किशोर ने कहा “सनातन धर्म के अपमान पर प्रतिक्रिया”

बीआर गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि 16 सितंबर को CJI ने एक मामले में मूर्ति को लेकर मजाक उड़ाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सनातन धर्म से जुड़े मामले आते हैं तो सुप्रीम कोर्ट ऐसे निर्णय पारित करता है जिससे वह दुखी होते हैं। किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह गोल्ड मेडलिस्ट हैं, वो नशे में नहीं थे और उनका कदम सीजेआई के सनातन धर्म के प्रति दिए जा रहे निर्णय और टिप्पणियों को लेकर आक्रोश का परिणाम था।

बोले “मुझे कोई खेद नहीं और किसी बात का डर भी नहीं”

राकेश किशोर ने कहा कि “मैं बहुत ज्यादा आहत हूं। सोलह सितंबर को सीजेआई ने एक केस में मूर्ति को लेकर मजाक उड़ाया। इन्हीं चीफ जस्टिस का दूसरे धर्म के केस पर अलग रवैया होता है। उन्होंने हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन की जमीन पर विशेष समुदाय के कब्जे पर स्टे लगा दिया। वहीं नूपुर शर्मा के बयान पर कोर्ट ने कहा कि आपने माहौल खराब किया। जब हमारे सनातन धर्म से जुड़ा मामला आता है तो उसपर वो कोई ऐसा ऑर्डर पास करते चले आ रहे हैं जिससे मैं बहुत दुखी हूं। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “हमारे भगवान, हमारे धार्मिक आयोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट निरंतर ऐसे निर्णय पारित कर रहा है जिससे मैं बेहद व्यथित हूं। भगवान विष्णु की मूर्ति की बात कर रहे व्यक्ति को आप रिलीफ ना दें लेकिन मजाक ना उड़ाएं। इसके चलते मैं आहत हुआ। मैं अहिंसा का पालन करने वाला व्यक्ति हूं। मेरे खिलाफ आज तक कोई मामला दर्ज नहीं है। ऐसे व्यक्ति को यह कदम क्यों उठाना पड़ा यह पूरे देश के लिए सोचने की बात है। मैं गोल्ड मेडलिस्ट हूं, मैं नशे में नहीं थ। मेरा रिएक्शन उनके एक्शन पर था। अब आप इसपर कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। मैं इसे लेकर डरा हुआ नहीं हूं। और ना ही मैंने जो किया उसका मुझे खेद है।” इस तरह राकेश किशोर ने ये कहा है कि इस घटना के बाद उन्हें किसी तरह का अफसोस नहीं है.. न ही वो इसके परिणामों को लेकर किसी तरह के भय में हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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