कोलकाता में ममता बनर्जी ने किया कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, SIR पर भी दिया बड़ा बयान, जानें क्या कहा?

25 फरवरी को भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में ममता बनर्जी ने कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। उन्होंने एसआईआर को लेकर भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा। यह भी कहा कि, "पीड़ित हिन्दू हो या मुस्लिम, मैं सभी के नाम हटाने के खिलाफ हूँ।"
Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बुधवार को भवानीपुर स्थित जैन मानस्तंभ का अनावरण किया। इसके अलावा कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया गया। इसके अलावा संत कुटीर गुरुद्वारा गेटवे, बिजॉयगंज बाजार पुलिस स्टेटस नई बिल्डिंग और टॉलीगंज में स्टेट ऑफ़ द आर्ट फायर स्टेशन का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य विकास, पब्लिक सेफ्टी और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने डायमंड हार्बर, वीरभूम, बांकुड़ा, पुरुलिया और हावड़ा में भी कई विकास प्रोजेक्ट का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए भवानीपुर को “मिनी इंडिया” बताया। साथ ही जाति और धर्म के सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर दिया। प्रत्येक समुदाय की विशेषताओं और सांस्कृतिक योगदानों पर चर्चा की। रमजान के महीने और होली की शुभकामनाएं भी दी।

सॉल्ट लेक में नई योजना की घोषणा 

सीएम बनर्जी ने सॉल्ट लेक में एक नई इमारत के निर्माण की घोषणा की है। यह इमारत सभी धर्म के लोगों के लिए अपने कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए एक प्लेटफार्म के रूप में काम करेगी। इसके अलावा उन्होंने जैन धर्म के साथ पश्चिम बंगाल के संबंध, गुजराती और पंजाबी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं के अपने ज्ञान का भी उल्लेख किया। यह भी बताया कि बंगाली और इन भाषाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता आ रहा है।

SIR को लेकर ECI पर बोला हमला 

कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने लोकतंत्र सिद्धांतों के प्रति अपना कमिटमेंट और महात्मा गांधी के विश्वास को दोहराया। और कहा कि, “आखरी में सच्चाई की जीत होनी चाहिए।” चुनाव आयोग पर चुपके से वैध वोटर्स के नाम हटाने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा एसआईआर प्रोसेस पर अन्य कई सवाल भी उठाये।  उन्होंने कहा, “करीब 1 करोड़ 20 लाख नागरिक इससे प्रभावित हुए हैं। जो लोकतंत्रित अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। यह मुद्दा पार्टी लाइन और धार्मिक पहचान से ऊपर है। यह लड़ाई लोकतंत्र को बचाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर नागरिक के अधिकार को सुरक्षित रहे।”

Manisha Kumari Pandey
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