प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में मंगलवार सुबह 11 बजे पहली बार केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होगी। यह बैठक सिर्फ अपने एजेंडे और नए भवन के लिए ही खास नहीं है, बल्कि यह पीएम मोदी की उस अनूठी परंपरा को भी आगे बढ़ाती है, जहां हर मंत्री को एक ‘गुड न्यूज’ साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इन साप्ताहिक बैठकों का प्रारूप तयशुदा सरकारी एजेंडे से कहीं आगे का होता है। इसमें सप्ताह भर के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर चर्चा, मंत्रियों से फीडबैक और सुझाव लिए जाते हैं। लेकिन इसका सबसे दिलचस्प पहलू है ‘गुड न्यूज’ का सत्र, जो आमतौर पर औपचारिक चर्चा के बाद होता है।
क्या है ‘गुड न्यूज’ की परंपरा?
यह परंपरा मंत्रियों को सकारात्मक और जन-केंद्रित कार्यों के लिए प्रेरित करने की एक पहल है। इसके तहत हर मंत्री को कोई ऐसी अच्छी खबर साझा करनी होती है, जो प्रेरणादायक हो। यह खबर उनके मंत्रालय की किसी बड़ी उपलब्धि से जुड़ी हो सकती है या फिर कोई व्यक्तिगत खुशी भी हो सकती है।
इसका उद्देश्य कैबिनेट के साथियों में एक सकारात्मक माहौल बनाना और एक-दूसरे के अच्छे कामों से सीखने के लिए प्रेरित करना है। उदाहरण के लिए, एक बार एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया था कि कैसे उन्होंने कुछ ही महीनों में घाटे में चल रहे एक सरकारी उपक्रम को 100 करोड़ रुपये के मुनाफे में बदल दिया। इसी तरह, कुछ मंत्री यह बताते हैं कि कैसे उनके मंत्रालय के किसी फैसले से आम लोगों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।
जब मंत्री ने दी पिता बनने की खुशखबरी
यह गुड न्यूज हमेशा सरकारी ही नहीं होती। पिछले साल का एक वाकया इसका बेहतरीन उदाहरण है, जब मौजूदा नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री और अन्य सहयोगियों को यह खुशखबरी दी थी कि वह पिता बन गए हैं और उनके घर बेटे का जन्म हुआ है। इस पर प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्रियों ने उन्हें बधाई दी थी।
यह पहल दिखाती है कि प्रधानमंत्री मोदी कैबिनेट को सिर्फ एक औपचारिक संस्था के तौर पर नहीं, बल्कि एक टीम के रूप में देखते हैं, जहां पेशेवर उपलब्धियों के साथ-साथ व्यक्तिगत खुशियां भी साझा की जाती हैं।
‘सेवा तीर्थ’ में नई शुरुआत
यह बैठक ‘सेवा तीर्थ’ में पहली कैबिनेट बैठक थी। इससे पहले 13 फरवरी को साउथ ब्लॉक स्थित पुरानी इमारत में आखिरी बैठक हुई थी, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय नए भवन में शिफ्ट हो गया था। सूत्रों ने बताया कि साउथ ब्लॉक की आखिरी बैठक में पीएम मोदी ने उस ऐतिहासिक इमारत से जुड़ी कई यादें साझा की थीं। उन्होंने बताया था कि कैसे आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली चार कैबिनेट बैठकें राष्ट्रपति भवन में हुई थीं और कैसे साउथ ब्लॉक ने देश के चार बड़े युद्धों की रणनीति बनते देखी है।
अब कैबिनेट सचिवालय भी राष्ट्रपति भवन से ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो गया है, जिससे कामकाज में और सुगमता आने की उम्मीद है। पास में ही प्रधानमंत्री का नया आवास भी बन रहा है, जिसके पूरा होने पर नया संसद भवन, पीएमओ, पीएम आवास और सभी मंत्रालय एक-दो किलोमीटर के दायरे में आ जाएंगे, जिससे वीवीआईपी मूवमेंट के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।






