जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद कोई विदाई भाषण भी नहीं होगा, अब आखिर इसकी क्या है वजह

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में कहा कि चिकित्सकीय सलाह का पालन करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए वे यह कदम उठा रहे हैं।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद कोई विदाई भाषण भी नहीं होगा, अब आखिर इसकी क्या है वजह

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 74 वर्षीय धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में कहा कि चिकित्सकीय सलाह का पालन करने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए वे यह कदम उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बीच कार्यकाल में इस्तीफा देने के कारण धनखड़ विदाई भाषण नहीं दे पाएंगे, जो पूर्ण पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले उपराष्ट्रपतियों को दिया जाता है।

धनखड़ तीसरे ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दिया है। इससे पहले वी.वी. गिरी (1967-1969) और आर. वेंकटरमण (1984-1987) ने भी राष्ट्रपति बनने से पहले उपराष्ट्रपति पद छोड़ा था। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम. वेंकैया नायडू ने 2017 से 2022 तक पूर्ण कार्यकाल पूरा किया था और उन्हें विदाई समारोह में सम्मानित किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने उनके योगदान की सराहना की थी। धनखड़ उस समारोह का हिस्सा थे जो सत्ता हस्तांतरण को सुचारू बनाने के लिए आयोजित किया गया था।

क्या कहता है संविधान

संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को लिखित में इस्तीफा दे सकते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने मंगलवार को धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अब उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह नए उपराष्ट्रपति के चुनाव तक दैनिक कार्यों का प्रबंधन करेंगे। जल्द ही उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने की उम्मीद है। धनखड़ ने अपने इस्तीफे में संविधान के अनुच्छेद 67(ए) का उल्लेख किया जो उपराष्ट्रपति के कार्यकाल और इस्तीफे से संबंधित है।

विपक्ष को नहीं हो रहा भरोसा

विपक्ष ने धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इसके पीछे के कारण स्वास्थ्य से कहीं अधिक गहरे हैं। विपक्ष का कहना है कि धनखड़ का इस्तीफा उनके लिए तो ठीक हो सकता है लेकिन यह उन लोगों पर खराब प्रभाव डालता है जिन्होंने उन्हें इस पद के लिए चुना था। विपक्ष ने इस मुद्दे पर गहन जांच की मांग की है और इसे सत्तारूढ़ पक्ष के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

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