उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का तलाक, मीडिएशन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

करीब डेढ़ दशक से अलग रह रहे दंपति का विवाह अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। मीडिएशन के जरिए सभी विवाद सुलझने के बाद अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत आपसी सहमति से तलाक को मंजूरी देते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
Omar Abdullah Divorce

फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 31 जुलाई को दोनों के आपसी समझौते के आधार पर तलाक की मंजूरी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान हो चुका है और उनसे जुड़े अन्य लंबित मामलों को भी वापस लेने पर सहमति बन गई है। इसके बाद अदालत ने आपसी सहमति के आधार पर विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के तलाक पर मुहर

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने उमर अब्दुल्ला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्षों ने मीडिएशन के जरिए सभी विवाद सुलझा लिए हैं। उन्होंने कहा “दोनों ने आजादी को अपना लिया है। सब कुछ तय हो गया है। लॉर्डशिप्स तलाक मंजूर कर सकते हैं। अन्य सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे।” पीठ ने जवाब दिया, “यह अच्छा है। हम इन्हीं शर्तों पर मामले का निपटारा करेंगे।”

दोनों ने संयुक्त रूप से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दायर कर आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की थी। यह आवेदन 22 जुलाई को दाखिल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तलाक की डिक्री देने का फैसला किया और अपील का निपटारा कर दिया।

लंबे समय से चल रहा था विवाद

उमर अब्दुल्ला और पायल सेठ की शादी 1 सितंबर 1994 को हुई थी। उन दोनों की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। उनके दो बेटे हैं जिनके नाम जहीर और जमीर है। ये जोड़ा 2009 से अलग रह रहे थे और सितंबर 2011 में सार्वजनिक रूप से अलगाव की घोषणा हुई थी। उमर अब्दुल्ला ने 2016 में फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, जो खारिज हो गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी दिसंबर 2023 में इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अगस्त 2024 में कोर्ट ने मीडिएशन का निर्देश दिया था

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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