प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर एक बड़ा सन्देश दिया है। दरअसल उन्होंने कहा कि अब इस फैसले को और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल को संसद की बैठक में इस विधेयक पर चर्चा होगी और इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा, ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण का प्रावधान लागू हो सके।
दरअसल प्रधानमंत्री ने कहा कि विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है। उनके अनुसार इस फैसले में और देरी होना दुर्भाग्यपूर्ण होगा, क्योंकि इससे लंबे समय से मौजूद असंतुलन और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, इसलिए जरूरी है कि हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है। इससे हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत और सहभागी बनेगा। इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी तरह की देरी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगी।” दरअसल प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 21वीं सदी की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में लोकतंत्र को और मजबूत बनाने वाला एक बड़ा कदम उठाया जाएगा। उनके अनुसार महिला आरक्षण का फैसला समानता, सहभागिता और जनभागीदारी की भावना को और मजबूत करेगा। इससे लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
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डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती का भी जिक्र किया
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बात कही है। दरअसल उन्होंने यह भी कहा है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब देश में कई महत्वपूर्ण पर्व मनाए जा रहे हैं। उन्होंने असम के रोंगाली बिहू, ओडिशा की महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल के पोइला बैशाख, केरल के विषु और पंजाब व उत्तर भारत की बैसाखी का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने 11 अप्रैल से शुरू होने वाले महात्मा फुले की 200वीं जयंती समारोह और 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन्हीं प्रेरणादायक अवसरों के बीच 16 अप्रैल को संसद में एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा की जाएगी। उनके अनुसार यह सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। प्रधानमंत्री ने नारीशक्ति के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और राष्ट्र निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज महिलाएं विज्ञान, व्यापार, खेल, सेना, कला और कई अन्य क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।
जानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय समावेशन और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच से महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी मजबूत हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं है। जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में भाग लेती हैं तो उनका अनुभव और दृष्टि शासन की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों में महिलाओं को विधायी संस्थाओं में उचित स्थान दिलाने के लिए कई प्रयास हुए, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। हालांकि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, जिसे उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं। यह कदम संविधान की उस भावना के अनुरूप होगा जिसमें समानता और न्याय को व्यवहार में लागू करने की बात कही गई है।






