मध्य प्रदेश में फिर चढ़ा सियासी पारा, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के निवास पर जुटे 3 दिग्गज

मध्य प्रदेश

नई दिल्ली डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश बीजेपी (Madhya Pradesh BJP) में राजनीतिक पारा एक बार फिर सरगर्मी चढ़ता नजर आ रहा है। पिछले कई दिनों से चलता हुआ मेल- मुलाकातों का दौर आज एक बार फिर परवान चढ़ा। रविवार को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल (Prahlad Patel)के निवास पर कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) व नरेन्द्र सिह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने बंद कमरे में करीब एक घंटे तक गुफ्तगू की।

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केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के बंगले पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी प्रदेश के राजनीतिक हलकों में एक बार फिर तूफान मचा गई। हालांकि इस मुलाकात में छत्तीसगढ़ बीजेपी के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद थे और इसे एक सामान्य दोपहर के भोज का नाम दिया गया। लेकिन बावजूद इसके सियासी हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई कि मध्य प्रदेश में राजनीति  (MP Politics) की दिशा और दशा किस ओर जा रही है।

जून के माह में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व प्रहलाद पटेल के बीच यह दूसरी मुलाकात है। इसके पहले कैलाश विजयवर्गीय भोपाल प्रवास के दौरान प्रदेश के गृह एवं जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) से भी मुलाकात कर चुके हैं। कई सालों के बाद कैलाश विजयवर्गीय की मध्य प्रदेश में अचानक बढ़ी सक्रियता ने राजनीतिक पंडितों नए समीकरण तो दिये ही है, साथ ही साथ मध्य प्रदेश मे कैलाश विजयवर्गीय के प्रशंसकों को भी उत्साह से भर दिया है।

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वही दिल्ली(Delhi) की इस मुलाकात में दिग्गजों के बीच में क्या बात हुई, इसका खुलासा तो नहीं हो पाया और पूछे जाने पर यही जवाब आया कि यह एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात थी और चारों ही नेता युवा मोर्चा के समय से ही अच्छे मित्र रहे हैं। लेकिन राजनीति इतनी आसान नहीं होती और इसमें कोई भी मेल या मुलाकात का होना बेवजह नहीं होता।मध्य प्रदेश में पिछले कई दिनों से जिस तरह से मेल- मुलाकातों का दौर बड़ा है वह प्रदेश की राजनीति में बदलते हुए परिदृश्य का संकेत देता प्रतीत होता है।

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12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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