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सरकारी बैंक कर्मचारियों की जल्द बढ़ेगी सैलरी, वित्त मंत्रालय ने वेतन संशोधन प्रक्रिया पूरा करने के दिए निर्देश

Written by:Pooja Khodani
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वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आगामी वेतन संशोधन प्रक्रिया को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं और इसे अगले 12 महीनों के भीतर पूरा करने को कहा है।
सरकारी बैंक कर्मचारियों की जल्द बढ़ेगी सैलरी, वित्त मंत्रालय ने वेतन संशोधन प्रक्रिया पूरा करने के दिए निर्देश

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के कर्मचारियों की सैलरी और वेतन संशोधन को लेकर वित्त मंत्रालय की ओर से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। ​ वित्तीय सेवा विभाग द्वारा 20 अप्रैल 2026 को जारी एक पत्र में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा है कि वे 13वें द्विपक्षीय समझौते (13th BPS) के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू करें और इसे अगले 12 महीनों के भीतर पूरा करें।

सरकार ने इस बार पर खासा जोर दिया है कि यह पूरी प्रक्रिया अधिकतम 12 महीनों के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को तय तारीख से ही नए वेतन का लाभ मिल सके। चुंकी पिछले अनुभवों में देखा गया है कि कई बार वेज सेटलमेंट तो हो जाता है, लेकिन उससे जुड़े नियमों में बदलाव काफी देर होने से कर्मचारियों को समय पर लाभ नहीं मिलता।

संभावना है कि सरकार के निर्देश के बाद बैंक और कर्मचारी संगठनों के बीच वेतन बढ़ाने को लेकर बातचीत जल्द शुरू होगी और तय समय में इसका फैसला भी आ जाएगा। वहीं सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए वेतन संशोधन एक नवंबर 2027 से दिया जाए। ​ 13वें द्विपक्षीय समझौते के लागू होने के बाद, वेतन में 15% से 20% तक की और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

बता दें कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों और बीमा कंपनियों समेत वित्तीय संस्थान हर 5 साल में अपने कर्मचारियों के वेतन में जरूरत के हिसाब से संशोधन करते हैं। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय बैंक संघ (IBA) कर्मचारी संगठनों और संघों के साथ बातचीत कर सहमति से वेज एग्रीमेंट तय किया जाता है। इस समझौते का सीधा लाभ पब्लिक सेक्टर बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलता है। पुराने प्राइवेट बैंकों और कुछ विदेशी बैंकों के कर्मचारी इसी तरह के वेतन समझौते के दायरे में आते हैं।

Pooja Khodani
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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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