पुलवामा हमले की बरसी आज, जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां, घाटी में सुरक्षाबल तैनात

आज जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए हमले की 7वीं बरसी है। इसे देखते हुए घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है।
Pulwama attack anniversary

आज केवल वैलेंटाइन डे नहीं बल्कि काला दिन कहे जाने वाले पुलवामा हमले की बरसी भी है। हमले को 7 साल गुजर चुके हैं लेकिन इसके घाव आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। ये वही दिन है जब भारत ने अपने 40 सीआरपीएफ जवानों को खो दिया था।

इस आतंकी हमले की बरसी को देखते हुए पूरे जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। घाटी और उच्च पर्वतीय इलाकों में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है। हर जगह औचक तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रवासी श्रमिकों और अल्पसंख्यक बस्तियों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

पुलवामा बरसी पर सर्च ऑपरेशन

आज के दिन को देखते हुए प्रशासन काफी अलर्ट है। बीते ही दिन श्रीनगर के लाल चौक में सुरक्षा एजेंसी की तरफ से बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कई संवेदनशील जगहों पर नाके तैनात किए गए हैं। होटल, लॉज और बिजनेस सेंटरों की गहन जांच की जा रही है। होटल मालिकों को रहने वाले लोगों का पूरा विवरण देकर वेरिफिकेशन करने को कहा गया है। यह सर्च अभियान एहतियात के तौर पर चलाया गया ताकि संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

ड्रोन के जरिए निगरानी

सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं और चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी कैमरा और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एजेंसियों की निगरानी है ताकि किसी भी तरह का भड़काऊ संदेश या अफवाह ना फैलाई जा सके। प्रशासन में आम लोगों से सतर्क रहने और सहयोग देने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या नजदीकी सुरक्षा बल को देने की सलाह भी दी गई है।

पुलवामा हमले की पूरी कहानी

ये हमला 14 फरवरी 2019 को दोपहर 3:10 मिनट पर जम्मू श्रीनगर हाईवे पर हुआ था। CRPF के 2500 से ज्यादा जवानों का काफिला जब हाईवे से गुजर रहा था। तब पुलवामा के लेथपोरा में तेजी से आई एक कार जवानों की बस से टकरा गई। इस कार में 300 किलो से ज्यादा विस्फोटक था जो कुछ ही सेकंड में आग के गोले में तब्दील हो गया। इसमें 40 से ज्यादा जवानों की जान चली गई थी।

आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। जैसे ही इस घटना की जानकारी लोगों को लगी पूरे देश में शोक की लहर दौड़ा गई। भारत माता के वीर जवानों के बलिदान से हर कोई आहत था। हम लेकर 12 दिन बाद भारत ने मुंह तोड़ जवाब दिया और बालाकोट में एयर स्ट्राइक की गई। इस स्ट्राइक में कई आतंकियों को मार गिराया गया। तभी से 14 फरवरी को शहीदों की याद के दिन के रूप में मनाया जाता है।

Diksha Bhanupriy
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10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy →
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