नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘वन स्टॉप सेंटर’ (OSCs) की कार्यप्रणाली पर रविवार को गंभीर सवाल खड़े किए। ये सेंटर हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं, लेकिन राहुल गांधी का आरोप है कि मोदी सरकार इन सेंटरों की बदहाली को लेकर किसी की नहीं सुन रही है और लगातार मिल रही शिकायतों को अनसुना कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला सुरक्षा महज एक सरकारी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सरकार की एक बुनियादी और अनिवार्य जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सऐप चैनल पर साझा की गई एक पोस्ट में बताया कि देशभर में महिलाएं मदद की उम्मीद में इन सेंटरों के दरवाजे खटखटा रही हैं, लेकिन उन्हें अक्सर बंद दरवाजे मिलते हैं। उन्होंने इसी मुद्दे को संसद में भी उठाया था, जहां उन्होंने पूछा था कि जब कोई महिला हिंसा से बचकर ‘वन स्टॉप सेंटर’ पहुंचती है तो उसे अपेक्षित मदद क्यों नहीं मिलती है? इसके बजाय, उसे बंद दरवाजे क्यों मिलते हैं? इन महत्वपूर्ण सेंटरों पर स्टाफ की इतनी कमी क्यों है? और देशभर से आ रही अनगिनत शिकायतें लगातार अनसुनी क्यों की जा रही हैं?
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उन्होंने सरकार के उस जवाब पर भी तीखा प्रहार किया, जिसमें OSCs की स्थिति को ‘संतोषजनक’ बताया गया था। राहुल गांधी ने सवाल किया कि अगर वास्तव में सब कुछ ‘संतोषजनक’ है, तो फिर इन वन स्टॉप सेंटरों से जुड़ी इतनी सारी समस्याओं और कुप्रबंधन की रिपोर्टें लगातार सामने क्यों आ रही हैं? उन्होंने आगे पूछा कि यदि महिला सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो फिर हर पांच में से तीन महिलाओं तक आवश्यक मदद अभी भी क्यों नहीं पहुंच पा रही है, जबकि उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है?
‘सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है महिला सुरक्षा’
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को आवंटित कुल 100 रुपये में से केवल 60 पैसे ही ‘वन स्टॉप सेंटरों’ पर खर्च किए जाने के आंकड़ों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार इस महत्वपूर्ण योजना को कितनी गंभीरता से ले रही है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि महिला सुरक्षा को केवल एक सरकारी योजना के रूप में देखना गलत है। यह सरकार की एक बुनियादी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि हर चीज को केवल ‘संतोषजनक’ बताकर टाल देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इससे केवल यही साबित होता है कि मोदी सरकार महिलाओं की वास्तविक समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने में असफल रही है।
राहुल गांधी ने लोकसभा में भी उठाया था OSC की कार्यप्रणाली का मुद्दा
राहुल गांधी ने 27 मार्च को लोकसभा में इस संबंध में कई विस्तृत सवाल पूछे थे, जो OSCs की कार्यप्रणाली की गहराई से जांच करने पर केंद्रित थे। उन्होंने जानना चाहा था कि क्या देश में कई ‘वन स्टॉप सेंटर’ बंद पड़े हैं, या वे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, अथवा तय नियमों के अनुसार चौबीसों घंटे संचालित नहीं हो रहे हैं। यदि ऐसी स्थिति है, तो उन्होंने सरकार से इसका पूरा और विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की थी।
उनके प्रश्नों में पिछले पांच सालों में ‘वन स्टॉप सेंटरों’ में मदद और पनाह मांगने वाली महिलाओं की कुल संख्या, साथ ही महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों के मामलों का राज्यवार और सालवार विस्तृत ब्योरा भी शामिल था। राहुल गांधी ने पिछले पांच सालों में चालू ‘वन स्टॉप सेंटरों’ की संख्या और इस दौरान खोले गए नए सेंटरों की संख्या के बारे में भी पूछा था, और इसका भी राज्यवार तथा सालवार ब्योरा मांगा था।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने इस अवधि के दौरान ‘वन स्टॉप सेंटरों’ के लिए जारी किए गए और वास्तव में इस्तेमाल किए गए फंड का ब्योरा भी मांगा था। इसमें राज्यवार और सालवार जानकारी के साथ-साथ फंड का पूरा इस्तेमाल न हो पाने के कारणों का भी स्पष्ट उल्लेख करने को कहा गया था। उन्होंने ‘वन स्टॉप सेंटरों’ में स्वीकृत और भरी गई विभिन्न पोस्टों के विवरण के बारे में भी पूछताछ की, जिसमें प्रशासक, केस वर्कर, काउंसलर, मेडिकल ऑफिसर और पुलिस जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। यह जानकारी भी राज्यवार मांगी गई थी। अंत में, उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि क्या मंत्रालय ने कुप्रबंधन या परिचालन दिशानिर्देशों के उल्लंघन की किसी शिकायत की जांच की है, और यदि हां, तो उसका विस्तृत विवरण और उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी जाए।
मंत्री का जवाब: 13.37 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिली सहायता, योजना ‘संतोषजनक’
राहुल गांधी के विस्तृत प्रश्नों के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ‘वन स्टॉप सेंटरों’ के संबंध में सरकार का पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ‘वन स्टॉप सेंटर’ योजना, ‘मिशन शक्ति’ नामक व्यापक अंब्रेला योजना के तहत आने वाले ‘संबल’ वर्टिकल का एक अभिन्न हिस्सा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये केंद्र हिंसा से प्रभावित और संकट में फंसी महिलाओं को, चाहे वे निजी या सार्वजनिक किसी भी स्थान पर हों, एक ही छत के नीचे एकीकृत और तत्काल सहायता और सहयोग प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
मंत्री सावित्री ठाकुर ने ‘वन स्टॉप सेंटरों’ द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं का भी उल्लेख किया। इनमें जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और सलाह, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता और मनो-सामाजिक परामर्श जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अपनी शुरुआत से लेकर, यानी 1 अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2025 तक, देश भर में 13.37 लाख से ज्यादा महिलाओं को इन सेंटरों के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है। मंत्री ने इस संबंध में ‘वन स्टॉप सेंटरों’ का राज्य और केंद्र शासित प्रदेश वार विवरण भी साझा किया।
सावित्री ठाकुर ने यह भी रेखांकित किया कि ‘वन स्टॉप सेंटर’ योजना का समग्र कार्यान्वयन और निगरानी मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की योजनाओं के दो ‘थर्ड पार्टी मूल्यांकन’ (तीसरे पक्ष द्वारा मूल्यांकन) किए गए हैं। पहला मूल्यांकन 2020 में और दूसरा 2025 में संपन्न हुआ, जिसमें ‘मिशन शक्ति’ अंब्रेला योजना और उसके ‘वन स्टॉप सेंटर’ से संबंधित घटक शामिल थे। ये मूल्यांकन NITI Aayog के माध्यम से करवाए गए थे। इन अध्ययनों में योजना की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और निरंतरता को ‘संतोषजनक’ पाया गया है, जो राहुल गांधी के आरोपों के विपरीत है।