राहुल गांधी ने ऑटो चालकों की समस्या पर केंद्र को घेरा, कहा- आमदनी का मीटर बंद और सुनने वाली सरकार बहरी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर महंगाई मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। इस बार उन्होंने ऑटो-रिक्शा चालकों की दुर्दशा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही राहुल गांधी ने सरकार पर 'बहरी' होने का आरोप भी लगाया है।
Rahul Gandhi

महंगाई और आमदनी के संकट से जूझ रहे ऑटो-रिक्शा चालकों की दुर्दशा को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ‘आमदनी का मीटर’ पूरी तरह से बंद हो चुका है, जबकि महंगाई पर लगाम कसने के सरकार के तमाम दावे विफल साबित हुए हैं। राहुल गांधी ने सरकार पर ‘बहरी’ होने का आरोप भी मढ़ा, यह कहते हुए कि वह जनता की समस्याओं को सुनने को तैयार नहीं है।

राहुल गांधी ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए की, जिसमें उन्होंने बीते दिन ऑटो-रिक्शा चालकों से हुई अपनी मुलाकात का जिक्र किया। इस मुलाकात के दौरान एक ऑटो चालक ने अपने दोपहर के भोजन के समय जो बात कही, वह देश के लाखों गरीबों की मार्मिक कहानी बयां करती है। चालक ने कहा था, “हम बर्बाद हो गए हैं और सुनने वाला कोई नहीं है।” राहुल गांधी ने इसी एक वाक्य में देश की आर्थिक स्थिति और आम आदमी के संघर्ष की पूरी तस्वीर देखी।

कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में विस्तार से लिखा कि किस प्रकार आय का मीटर थम गया है और जीवनयापन की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के ब्रेक फेल हो चुके हैं, जिससे आम आदमी का जीवन दूभर हो गया है। सरकार, जिसका मूल कर्तव्य जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है, वह आज बहरी बनी हुई है, ऐसा राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा।

राहुल गांधी ने महंगाई मुद्दे पर सरकार को घेरा

उन्होंने महंगाई के विभिन्न पहलुओं पर सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने उल्लेख किया कि सीएनजी से लेकर एलपीजी तक, बच्चों की पढ़ाई के खर्च से लेकर इलाज तक, और दूध से लेकर खाने के तेल तक, हर बढ़ती कीमत सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के बजट पर हमला कर रही है। यह बढ़ोतरी उनकी रसोई पर सीधा असर डाल रही है, जिससे रोजमर्रा का जीवन और भी कठिन हो गया है। राहुल गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री मोदी लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह देते हैं, वहीं दूसरी ओर जो लोग इस सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ हैं – यानी ऑटो-रिक्शा चालक – वे आज महंगाई के भारी बोझ तले दबकर टूट रहे हैं।

राहुल गांधी ने इन चालकों की वर्तमान स्थिति को दर्शाते हुए एक मार्मिक प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि आज इन चालकों की थाली में रोटी-दाल के साथ एक बड़ा सवाल भी है “कल की रोटी कहां से आएगी?” यह प्रश्न लाखों परिवारों के भविष्य की अनिश्चितता को दर्शाता है, जो अपनी दैनिक आय से ही अपना घर चलाते हैं।

राहुल गांधी ने की थी ऑटो-रिक्शा चालकों से मुलाकात

इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को राहुल गांधी ने दिल्ली के टोडरमल पार्क में कई ऑटो-रिक्शा चालकों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने न केवल उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि उनके साथ एकरूपता दिखाने के लिए ऑटो चालक की वर्दी भी पहनी। उन्होंने बच्चों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और बाद में स्वयं ऑटो रिक्शा में बैठकर वहां से रवाना हुए। इस मुलाकात और उसके बाद की टिप्पणी से राहुल गांधी ने सरकार पर दबाव बनाने और आम आदमी की समस्याओं को उजागर करने का प्रयास किया है।

Shyam Dwivedi
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Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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