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नागपुर में बोले राजनाथ सिंह- ‘पड़ोसी सिरफिरा’, हरकतों का कोई भरोसा नहीं, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अत्यंत महत्वपूर्ण

Written by:Rishabh Namdev
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में चीन और पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि 'पड़ोसी सिरफिरा' है, इसलिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उन्होंने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी 50% तक बढ़ाने और 2030 तक 50,000 करोड़ रुपए के निर्यात का लक्ष्य रखने की भी बात कही।
नागपुर में बोले राजनाथ सिंह- ‘पड़ोसी सिरफिरा’, हरकतों का कोई भरोसा नहीं, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अत्यंत महत्वपूर्ण

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्हें ‘सिरफिरा’ करार दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी की हरकतों का कोई भरोसा नहीं, इसलिए रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का लक्ष्य डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निजी क्षेत्र की भूमिका को 50% तक बढ़ाना है।

राजनाथ सिंह नागपुर स्थित इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव कंपनी के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर सरकार की योजनाओं को विस्तार से बताया।

‘पड़ोसी सिरफिरा, कब हथियार चाहिए पता नहीं’

रक्षा मंत्री ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि भारत को अपने पड़ोसियों से सतर्क रहने की जरूरत है।

“हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब क्या हरकत कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि हमें हथियारों की आवश्यकता कब पड़ जाए। इसी वजह से हमें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना ही पड़ेगा।” — राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री

उन्होंने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कुछ युद्ध कई वर्षों तक चलते हैं, जैसे रूस-यूक्रेन, तो कुछ कुछ घंटों में ही खत्म हो जाते हैं। ऐसे में हर स्थिति के लिए तैयार रहना आवश्यक है और इसके लिए स्वदेशी हथियार और तकनीक सबसे बड़ा संबल है।

रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की 50% भागीदारी का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक समय था जब रक्षा उत्पादन पूरी तरह से सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) तक ही सीमित था, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का मानना है कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में निजी क्षेत्र की भूमिका कम से कम 50% तो होनी ही चाहिए।”

उन्होंने पिछले 10 वर्षों में हुई प्रगति के आंकड़े भी साझा किए। रक्षा मंत्री के अनुसार, 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर डेढ़ लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

निर्यात में 25 गुना की बढ़ोतरी

रक्षा मंत्री ने बताया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी का ही परिणाम है कि भारत का रक्षा निर्यात पिछले 10 वर्षों में 25 गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा, “10 साल पहले हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 1000 करोड़ रुपए के आसपास था, जो अब बढ़कर लगभग 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। हमने 2030 तक इसे 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।”

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही हथियारों के उत्पादन का एक ग्लोबल हब बनेगा। इस दौरान उन्होंने ‘नागास्त्र’ जैसे स्वदेशी हथियारों के आधुनिक संस्करणों के विकास का भी जिक्र किया, जो भविष्य में दुश्मनों के लिए घातक साबित होंगे।