हार के बाद कांग्रेस में कलह! अब सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने उठाए गंभीर सवाल

हार के बाद कांग्रेस में कलह! अब सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट| बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) और मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में उपचुनाव (Byelection) में मिली हार के बाद कांग्रेस (Congress) में अंतरकलह खुलकर सामने आ रही है| पार्टी के बड़े नेता लगातार नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं| कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Gulam Nabi azad) का बड़ा बयान सामने आया है| बिना नाम लिए उन्होंने आलाकमान पर निशाना साधा है| उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस सबसे निचले स्तर पर है| पार्टी के बड़े नेताओं का कार्यकर्ता से संपर्क टूट गया है| फाइव स्टार होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते|

कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, पार्टी से जुड़े हमारे लोगों का जमीनी स्तर पर संपर्क खत्म हो गया है. लोगों का पार्टी से प्यार होना चाहिए. पिछले 72 सालों में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है| उन्होंने कहा कि जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है, वो समझता है बस मेरा काम खत्म हो गया, काम तो उस समय से शुरू होना चाहिए|

आजाद ने कहा कि चुनाव पांच सितारा संस्कृति से नहीं जीते जाते हैं| आज के नेताओं के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर उन्हें पार्टी का टिकट मिलता है, तो वे पहले पांच सितारा होटल बुक कराते हैं| उन्होंने कहा कि अब पांच सितारा संस्कृति को छोड़ने का वक्त आ गया है. जब तक इसे नहीं छोड़ेंगे तब तक कोई चुनाव नहीं जीता जा सकता|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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