सोनम वांगचुक की पत्नी की सुप्रीम कोर्ट में गुहार; निगरानी पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। इन प्रदर्शनों का कारण लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग थी।
सोनम वांगचुक की पत्नी की सुप्रीम कोर्ट में गुहार; निगरानी पर उठाए सवाल

लद्दाख के ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस और खुफिया ब्यूरो पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन करने का आरोप लगाया है। गीतांजलि का कहना है कि जब वह जोधपुर सेंट्रल जेल में अपने पति से मिलने गईं, तब राजस्थान पुलिस और आईबी अधिकारियों ने उनका पीछा किया और कड़ी निगरानी रखी। उन्होंने कोर्ट से सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के परिवार की स्वतंत्रता भी छीनी जा सकती है? यह मामला मौलिक अधिकारों पर बहस को जन्म दे रहा है।

गीतांजलि ने अपनी शिकायत में बताया कि 7 और 11 अक्टूबर को जोधपुर हवाई अड्डे पर उतरते ही अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। उन्हें पर्दे लगी गाड़ियों में जेल ले जाया गया, जहां मुलाकात के दौरान अधिकारी उनके पास मौजूद रहे और उनकी बातचीत पर नजर रखी। गीतांजलि ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके पति के कानूनी निर्देशों वाले नोट्स की तस्वीरें खींचीं और उन्हें जोधपुर में किसी अन्य व्यक्ति से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उनकी शिकायत में कहा गया कि इस तरह का व्यवहार उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। इन प्रदर्शनों का कारण लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग थी। हिरासत के बाद वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया। गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ कर रही है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के दुरुपयोग पर भी सवाल उठा रहा है।

जेल से लेकर रेलवे स्टेशन तक हर गतिविधि पर नजर

गीतांजलि ने अपनी याचिका में जोर देकर कहा कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी गई, यहां तक कि जेल से निकलने के बाद उन्हें रेलवे स्टेशन तक ले जाया गया और उनके साथ ट्रेन में भी अधिकारी दो घंटे तक रहे। इस घटनाक्रम ने निगरानी और गोपनीयता के अधिकारों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला न केवल वांगचुक की हिरासत, बल्कि उनके परिवार के अधिकारों और सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहा है। यह मामला देश में नागरिक स्वतंत्रता और कानून के दायरे में संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है।

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