चिप्स-नमकीन-कोल्ड ड्रिंक जैसे जंक फूड पर दिखेगा खतरे का सिग्नल! वार्निंग लेबल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को दो हफ्ते का समय

क्या आपको भी टीवी देखते हुए बिंज ईटिंग की आदत है। इंतज़ार करते हुए, तफरीह के दौरान या दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए चिप्स, कुकीज़ और स्नैक्स के पैकेट खाली होते जाते हैं। अगर ऐसा है तो ये आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। इस विषय पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर रुख अपनाया है।
Supreme Court

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देश में बच्चों और बड़ों के बीच मोटापे की बढ़ती समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जंक फूड कंपनियों और सरकार के लिए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट ऑफ पैक वार्निंग लेबल को लेकर केंद्र सरकार से दो हफ्ते के भीतर फैसला लेने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।

ये मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है जिसमें मांग की गई है कि जिन पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में चीनी, नमक, सैचुरेटेड फैट या कैलोरी की मात्रा अधिक है, उनके पैकेट के सामने ही इसकी स्पष्ट चेतावनी दी जाए। इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता सामान खरीदते समय बिना पैकेट पलटे ही उसके पोषण संबंधी जोखिम को समझ सके।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से इस मामले में देरी को लेकर सवाल किए हैं। कोर्ट पहले भी ऐसे चेतावनी लेबल की जरूरत पर विचार करने के निर्देश दे चुका है। अब केंद्र को दो हफ्ते के भीतर अपना अंतिम रुख अदालत के सामने रखना है।

मोटापे में बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ी चिंता बच्चों और किशोरों को लेकर है। पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में अधिक चीनी, नमक और फैट की मौजूदगी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही स्पष्ट जानकारी देने की मांग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि व्यावसायिक हितों से ऊपर लोगों का स्वास्थ्य होना चाहिए।

स्वाद के चक्कर में न करें स्वास्थ्य से समझौता

ये मामला ऐसे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से जुड़ा है जिनमें चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है।  याचिका में मांग की गई है कि ऐसी चीजों के पैकेट के सामने साफ तौर पर चेतावनी दी जाए, ताकि ग्राहक सामान खरीदते समय आसानी से समझ सकें कि उसमें इन पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो चिप्स, नमकीन, मीठे पेय और अन्य पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के पैकेट पर सामने की तरफ अधिक चीनी, अधिक नमक या अधिक सैचुरेटेड फैट जैसी चेतावनी उपभोक्ताओं को दिखाई दे सकती है। इसका उद्देश्य लोगों को खरीदारी के समय ही अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प चुनने में मदद करना है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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