बिहार में SIR के नाम पर चुनाव में धांधली की रची गई साजिश, सुप्रिया श्रीनेत ने लगाए गंभीर आरोप

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट में तर्क दिया कि आधार कार्ड कोई नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है, क्योंकि इसे भारत में केवल 182 दिन रहने पर प्राप्त किया जा सकता है।
बिहार में SIR के नाम पर चुनाव में धांधली की रची गई साजिश, सुप्रिया श्रीनेत ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) के नाम पर चुनावी धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने बिहार में 4 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े हैं, जिनमें से केवल 27% मतदाता 18 से 20 वर्ष की आयु के हैं, जबकि शेष सभी उससे अधिक उम्र के हैं। कुछ मतदाताओं की उम्र 100 वर्ष तक बताई जा रही है। श्रीनेत ने कहा कि 58% ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज की थी, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया।

श्रीनेत ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि बिहार में एसआईआर के नाम पर पूर्ण षड्यंत्र रचा गया है, जिसका मकसद चुनावों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम सुनियोजित तरीके से उठाया गया है ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके। कांग्रेस नेता ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक बताया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

आदेश को संशोधित करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने 8 सितंबर के आदेश को संशोधित करने से इनकार कर दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग को बिहार के एसआईआर के तहत मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आधार कार्ड को 12वें पहचान दस्तावेज के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड के साथ-साथ राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य दस्तावेज भी जालसाजी के लिए अतिसंवेदनशील हैं, इसलिए आधार को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में अंतिम तर्क के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है।

आधार कार्ड और नागरिकता का सवाल

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कोर्ट में तर्क दिया कि आधार कार्ड कोई नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है, क्योंकि इसे भारत में केवल 182 दिन रहने पर प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार में लाखों रोहिंग्या और बांग्लादेशी मौजूद हैं और आधार कार्ड के उपयोग की अनुमति देना विनाशकारी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया और कहा कि यदि एसआईआर में कोई अवैधता पाई गई, तो यह प्रक्रिया रद्द की जा सकती है।

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