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ताजमहल वक़्फ़ प्रॉपर्टी है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर विवाद तक, जानें पूरा सच

Written by:Ronak Namdev
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ताजमहल का मालिक कौन है इसको लेकर तो सवाल काफी समय से उठ रहे हैं सुन्नी वक्फ बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसकी हकीकत सामने लाकर रख दी, चलिए बताते हैं कौन है ताजमहल का मालिक
ताजमहल वक़्फ़ प्रॉपर्टी है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लेकर विवाद तक, जानें पूरा सच

वैसे तो ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में से एक और इतिहास में भी काफी मशहूर है, लेकिन पिछले कुछ सालों से इसके मालिकाना हक को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने ताजमहल तो अपनी संपत्ति बताई जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा कोर्ट ने वक़्फ़ बोर्ड के दावों को खारिज करते हुए ताजमहल जो भारत सरकार की प्रॉपर्टी घोषित कर दिया।

ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहां ने 1631 में अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाना शुरू किया था जो लगभग 1653 में बनकर तैयार हो गया था। जो फिलहाल में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट मैं शामिल है लेकिन 2005 में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने इसे अपनी वक़्फ़ की संपत्ति होने का दावा ठोक दिया था इसके बाद इस पर कई तरीके की राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस भी शुरू हो गई थी। वक्फ यही नहीं रुका बल्कि ताजमहल के साथ – साथ बोर्ड ने कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा और जैसी न जाने कितनी ही ऐतिहासिक इमारतों पर अपना दावा ठोक दिया था।

वक़्फ़ बोर्ड ने क्यों माँगा था, ताजमहल पर मालिकाना हक

सुन्नी बकब बोर्ड ने 2005 में ही ताजमहल जो वक्त संपत्ति के तौर पर रजिस्टर कर लिया था उनका मानना था कि शाहजहां मुस्लिम राजा थे और ताजमहल में मस्जिद होने की वजह से यह इस्लामी रीति रिवाज के अनुसार वक़्फ़ है, उनका यह भी कहना था कि परिसर में मस्जिद की मौजूदगी होना यह सबूत है कि यह एक धार्मिक संपत्ति है, उन्होंने यह भी कहा कि मुगल समय में ऐसी कई इमारतें बनी थी जो की वक्फ के अंदर आती थी। लेकिन उनके पास ऐसा कोई भी सबूत नहीं था जहां पर यह लिखा हो कि शाहजहां ने अपनी इस प्रॉपर्टी को वक्फ को दिया था।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का ताजमहल के ऊपर फैसला

2018 में या मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच कोर्ट ने सुनी वक़्फ़ बोर्ड से सवाल किया कि क्या कहा जहां ने आपको किसी डॉक्यूमेंट पर साइन करके दिया है कि यह वक़्फ़ की संपत्ति है उसे पर वक़्फ़ बोर्ड किसी भी तरह का कोई सबूत पेश नहीं कर पाया इसके बाद कोर्ट ने यह सांप का दिया कि बिना किसी सबूत और ऐतिहासिक दस्तावेज के इस वक्त की संपत्ति नहीं माना जा सकता कोर्ट ने बोर्ड को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपने पहले कभी यह दवा क्यों नहीं उठाया। आखिरकार वक़्फ़ बोर्ड अपना यह दावा हार जाता है और फिर इसे वापस ले लेता है जिससे बाद कोर्ट ने ताजमहल को भारत सरकार की संपत्ति घोषित कर दिया, जिसे अब आर्कियोलॉजीकल सर्वे आफ इंडिया (ASI) द्वारा संभाला जाता है।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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