
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार से जीएसटी दरों में कटौती के बाद राज्यों को पांच साल तक मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जीएसटी रेशनलाइजेशन से राज्यों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे तेलंगाना को प्रति वर्ष लगभग 7000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। रेड्डी ने इस मुद्दे पर केंद्र से सभी राज्यों के लिए मुआवजे की वकालत की।
रेवंत रेड्डी ने माओवादियों के साथ बातचीत की भी पैरवी की, जो मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वह आतंकवादियों और पाकिस्तानी एजेंसियों से बात कर सकती है, तो भारतीय माओवादियों से क्यों नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, क्योंकि हत्याएं कोई समाधान नहीं हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास लंबित बिल
तेलंगाना विधानसभा में आरक्षण से संबंधित बिलों के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास लंबित होने के सवाल पर रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मुद्दे पर 10 दिन की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा है, जिसमें राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित बिलों पर गवर्नर और राष्ट्रपति द्वारा सहमति की समयसीमा का सवाल उठा था।
परिवार का निजी मामला करार दिया
के. कविता के भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से इस्तीफे को रेड्डी ने के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के परिवार का निजी मामला करार दिया। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना ने सामाजिक रूप से केसीआर के परिवार का बहिष्कार कर दिया है। रेड्डी ने जोर देकर कहा कि जीएसटी रेशनलाइजेशन से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र को राज्यों का समर्थन करना चाहिए।
