दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़े वीडियो विवाद में पंजाब के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा नोटिस जारी किया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव, जालंधर के पुलिस कमिश्नर और अतिरिक्त सचिव गृह को 20 फरवरी तक स्पष्टीकरण देने का अंतिम मौका दिया गया है।
इससे पहले 12 फरवरी की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन जवाब न मिलने पर दिल्ली विधानसभा ने फटकार लगाते हुए नई डेडलाइन दी है। पत्र में साफ किया गया है कि निर्धारित समय तक जवाब न आने पर विशेषाधिकार हनन और अवमानना की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
सौरभ भारद्वाज का भाजपा पर पलटवार
इस पूरे प्रकरण पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भड़क गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को आज प्रिविलेज कमेटी की याद आ रही है, जबकि दस साल तक दिल्ली में आप की सरकार रहने के दौरान भाजपा के एलजी ने कभी दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल तक को विधानसभा समिति के सामने पेश नहीं होने दिया।
“दस साल तक आप विधायक सवाल लगाते थे कि हमारे यहां नशा बिक रहा है, मर्डर हो रहे हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस से जवाब नहीं आता था। कहा जाता था कि विधानसभा को दिल्ली पुलिस से सवाल पूछने का अधिकार नहीं है। वही भाजपा आज कह रही है कि पंजाब का डीजीपी यहां आकर रिपोर्ट करे।”- सौरभ भारद्वाज
भारद्वाज ने केंद्र सरकार और एलजी से अपने गिरेबान में झांकने की बात कहते हुए दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
संस्थाओं को तहस-नहस करने का आरोप
आप नेता ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा ने संस्थाओं को तहस-नहस कर दिया है। अब वही भाजपा इन्हीं संस्थाओं के जरिए पंजाब के डीजीपी को तलब करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इससे पहले दिल्ली की बीजेपी सरकार, केंद्र और एलजी को अपने कामकाज की समीक्षा करनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़ा हुआ है। उन पर सदन की कार्यवाही के दौरान सिख गुरुओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। इसी संदर्भ में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं और पंजाब पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
इसके बाद दिल्ली विधानसभा ने पंजाब के अधिकारियों को नोटिस भेजकर पूरे प्रकरण में स्पष्टीकरण मांगा। पंजाब की आप सरकार ने इस मामले में दिल्ली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आप की दो राज्य सरकारों के बीच असहमति का मामला बन गया है। देखना होगा कि आगे इस मुद्दे पर किस प्रदेश की सरकार का पलड़ा भारी रहता है और पंजाब के अधिकारी 20 फरवरी तक कैसा जवाब देते हैं।





